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“दिल्ली के 1,000 स्कूलों का ऑडिट: सरकार उतारेगी इंटर्न्स की टीम”

 

इंजीनियरिंग छात्रों और 12वीं पास युवाओं को मिलेगा मौका

दिल्ली सरकार ने राजधानी के सरकारी स्कूलों की आधारभूत संरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) की स्थिति का व्यापक आकलन करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार जल्द ही लगभग 1,000 से अधिक स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट करवाने जा रही है, जिसके लिए इंटर्न्स की एक विशेष टीम तैनात की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य युवा छात्रों को ग्राउंड लेवल पर काम करने का अनुभव देना और स्कूलों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझकर सुधार योजनाओं को तेज करना है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत अंडरग्रेजुएट इंजीनियरिंग छात्र और कक्षा 12 पास युवा इंटर्नशिप के लिए आवेदन कर सकेंगे। इंटर्न्स को तीन महीने का फील्डवर्क करना होगा, जिसके दौरान वे दिल्ली के विभिन्न इलाकों में स्थित सरकारी स्कूलों का दौरा करेंगे। वे वहां भवनों की स्थिति, कक्षाओं की मजबूती, लैब्स, लाइब्रेरी, बिजली-पानी के प्रबंध, सुरक्षा उपाय, खेल सुविधाएं और अन्य बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर का आकलन करेंगे।

इंटर्न्स को मिलेगा ₹15,000 मासिक स्टाइपेंड

अधिकारियों ने बताया कि इंटर्न्स को डिजिटल अस्सेसमेंट टूल्स का इस्तेमाल करना भी सिखाया जाएगा, जिससे डेटा संग्रह और रिपोर्ट तैयार करना आसान हो सके। इंटर्न्स सीधे जूनियर इंजीनियर्स और अन्य तकनीकी कर्मचारियों के साथ काम करेंगे, जिससे उन्हें व्यावहारिक इंजीनियरिंग कौशल सीखने का अवसर मिलेगा। सरकार ने कहा है कि इन इंटर्न्स को महीने का लगभग ₹15,000 स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। इससे न केवल युवाओं को आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि उन्हें भविष्य में इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट क्षेत्रों में काम का महत्वपूर्ण अनुभव भी प्राप्त होगा। दिल्ली सरकार का मानना है कि इस ऑडिट से स्कूल ढांचे में मौजूद वास्तविक कमियाँ सामने आएंगी, जिनके आधार पर आने वाले सालों में बड़े स्तर पर सुधार कार्य किए जा सकेंगे।

स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता

 

इसके साथ ही, सरकार का यह भी कहना है कि स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और समग्र विकास के लिए बेहद आवश्यक है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत अगले कुछ सप्ताहों में होने की उम्मीद है, और चयन प्रक्रिया जल्द ही जारी की जाएगी। कई विशेषज्ञों ने इस कदम को स्वागत योग्य बताते हुए कहा कि इससे न केवल स्कूलों का सुधार होगा, बल्कि युवाओं को भी बड़ा सीखने का अवसर मिलेगा।

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