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आयुर्वेदिक अस्पताल बना बांझपन से जूझ रहे दंपतियों के लिए उम्मीद की किरण

 किलकारियों से पूरा हुआ खुशियों का आंगन, वर्षों बाद हुआ इंतजार पूरा  

बच्चों की किलकारी सुनने के लिए सालो तक इंग्लिश दवा खाई, हवन- पूजा और कई जगह दान भी दिया लेकिन निराशा के अलावा कुछ हाथ नहीं आया’ अमिना (बदला हुआ नाम) जो सेक्टर 1 में रहती हैं उन्होंने बताया कि पिछले 10 सालों से बांझपन के कारण वह परेशान थी, जिसके बाद उसने आयुर्वेद इलाज लेने का मन बनाया और इसका परिणाम भी उन्हें दिखाई दिया। सेक्टर-39 स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले आए, डॉ. दीपिका ने बताया कि महीने में 25-30 ऐसी महिलाएं आती हैं, जो गर्भधारण न होने के कारण परेशान रहती है। डॉ. दीपिका ने बताया कि महिलाओं की समस्या के अनुरूप कंसल्ट कर आगे की प्रक्रिया की जाती है। बताते चलें कि पंचकर्म की प्रक्रिया के लिए दूसरे निजी या सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल भेजा जाता है। वहीं भंगेल की आयुर्वेदिक स्पेशलिस्ट डॉक्टर ज्योति त्यागी ने बताया कि आयुर्वेद अब गर्भवती होने की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहां डॉक्टर पारंपरिक पंचकर्म उपचार की मदद से उन महिलाओं को नई जिंदगी दे रहे हैं, जो कई वर्षों से मां बनने का इंतजार कर रही थीं।

क्या है पंचकर्म…


पंचकर्म आयुर्वेद की प्रमुख उपचार पद्धति है, जिसमें शरीर की आंतरिक सफाई, दोषों को संतुलित करना और प्रजनन तंत्र को मजबूत बनाने पर फोकस किया जाता है। इसमें बस्ती, वमन, विरेचन, शिरोधारा और अभ्यंग जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। यह उपचार शरीर में जमा विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने के साथ हार्मोनल असंतुलन को भी ठीक करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रक्रिया खास तौर पर उन महिलाओं के लिए प्रभावी मानी जाती है जिन्हें पीसीओडी, एंडोमेट्रियोसिस, ब्लॉकेज और अनियमित पीरियड जैसी समस्याएं होती हैं। यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों में मुख्य रूप से 

  • कई सालों से संतान सुख न पाने वाली महिलाएं
  • हार्मोनल डिसऑर्डर से पीड़ित
  • पीसीओडी/पीसीओएस
  • ब्लड सर्कुलेशन संबंधित समस्याएं
  • तनाव और अनिद्रा से प्रभावित महिलाएं
  • गर्भाशय में कमजोरी या ब्लॉकेज जैसी समस्या

इनमें से कई मरीज आधुनिक तरीकों से इलाज करवाने के बाद भी निराश होकर यहां पहुंचते हैं और उन्हें पंचकर्म की मदद से सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।

 

उपचार कितने समय तक चलता है…


डॉक्टरों के अनुसार, पंचकर्म की अवधि मरीज की समस्या पर निर्भर करती है। आमतौर पर यह प्रक्रिया 21 से 45 दिनों तक चलती है। इस दौरान मरीज को नियमित थेरेपी, आहार नियम और जीवनशैली में सुधार के निर्देश दिए जाते हैं। कुछ मामलों में पहले ही महीने में सुधार दिखाई देने लगता है, जबकि कुछ में 2-3 चक्र तक प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है।

सेक्टर-39 के आयुर्वेदिक अस्पताल की डॉक्टर दीपिका के पास ऐसे कई मामले आए, जिन्हें विस्तृत जांच के बाद दूसरे आयुर्वेदिक अस्पताल के विशेषज्ञ पंचकर्म केंद्र में भेजा गया। 


पहला केस:
32 वर्षीय महिला, जो छह साल से मातृत्व सुख से वंचित थी। उन्हें पीसीओडी और हार्मोनल असंतुलन की समस्या थी। जब उनका इलाज शुरू हुआ तो 30 दिनों की बस्ती और अभ्यंग थेरेपी के बाद ओवुलेशन में सुधार हुआ और तीन महीने बाद गर्भ ठहर गया।

दूसरा केस:
28 वर्षीय महिला, जिसके दोनों फेलोपियन ट्यूब में हल्का ब्लॉकेज पाया गया। पंचकर्म के वमन और बस्ती उपचार के बाद ब्लॉकेज में कमी आई और डॉक्टरों ने इसे प्राकृतिक रूप से गर्भधारण के लिए उपयुक्त बताया।

तीसरा केस:
35 वर्षीय महिला, लगातार तनाव, अनियमित पीरियड और गर्भाशय की कमजोरी से परेशान थी। शिरोधारा और अभ्यंग के साथ विशेष औषधियों के सेवन से मात्र दो माह में हार्मोन स्तर संतुलित हुए और मासिक चक्र नियमित हुआ।


आयुर्वेदिक अस्पतालों में मिल रही इन सफलताओं के कारण अब कई दंपति एक बार फिर उम्मीद के साथ यहां पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पंचकर्मा आधुनिक चिकित्सा के साथ पूरक रूप में काम करता है और सही मार्गदर्शन में यह निःसंतानता का प्रभावी समाधान बन सकता है।

 

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