Railway : AC-3 में कंफर्म टिकट के बावजूद नहीं मिली बर्थ, अब रेलवे देगा ₹35 हजार हर्जाना

कंफर्म टिकट होने के बावजूद यात्रियों को करना पड़ा खड़े होकर सफर

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Mediawali news

अगर आपने ट्रेन में कंफर्म टिकट लिया है, तो सीट या बर्थ पर आपका पूरा अधिकार है। लेकिन अगर रेलवे आपको आपकी सीट नहीं दिला पाता, तो यह सेवा में लापरवाही मानी जाएगी। ऐसा ही एक मामला सामने आने के बाद उपभोक्ता फोरम ने भारतीय रेलवे को यात्रियों को ₹35 हजार हर्जाना देने का आदेश दिया है। यह मामला मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) से पटना जाने वाली 13202 डाउन लोकमान्य तिलक टर्मिनस-पटना एक्सप्रेस ट्रेन का है। चार यात्रियों ने विंध्याचल से आरा तक AC-3 के B4 कोच में कंफर्म टिकट बुक कराया था, लेकिन उन्हें यात्रा के दौरान अपनी सीट नहीं मिल सकी।

रेलवे स्टाफ ने कब्जा कर रखा था बर्थ

रिपोर्ट के अनुसार, जब यात्री ट्रेन में सवार होकर अपनी सीट पर पहुंचे तो वहां पहले से कुछ लोग बैठे थे। पूछने पर उन्होंने खुद को रेलवे स्टाफ बताया और सीट खाली करने से साफ इनकार कर दिया। यात्रियों ने कई बार अनुरोध किया, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। यहां तक कि ट्रेन में मौजूद रेलवे कर्मचारियों से भी मदद मांगी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन यात्रियों को पूरी यात्रा खड़े होकर करनी पड़ी। इस घटना से यात्रियों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

ट्रेन से उतरने के बाद यात्रियों ने रेल मंत्रालय और भारतीय रेलवे विभाग में शिकायत दर्ज कराई। लेकिन लंबे समय तक कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित यात्रियों ने भोजपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (कंज्यूमर फोरम) का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई फोरम के अध्यक्ष कृष्ण प्रताप सिंह और सदस्य कमल किशोर सिंह ने की। इस केस में उत्तर मध्य भारतीय रेलवे और रेल मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया था।

रेलवे ने दी दलील, कोर्ट ने किया खारिज

सुनवाई के दौरान भारतीय रेलवे की ओर से कहा गया कि यह कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है और इसमें रेलवे की सेवा में कोई कमी नहीं है। रेलवे ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में जीआरपी ज्यादा जिम्मेदार होती है। हालांकि, उपभोक्ता फोरम ने भारतीय रेलवे  की इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि जब भारतीय रेलवे  किसी यात्री को कंफर्म टिकट बेचता है, तो उसे सीट उपलब्ध कराना भी रेलवे की जिम्मेदारी है। फोरम ने माना कि यात्रियों को यात्रा के दौरान भारी परेशानी हुई और यह सीधे तौर पर सेवा में लापरवाही का मामला है।

रेलवे को देना होगा ₹35 हजार हर्जाना

उपभोक्ता फोरम ने आदेश दिया कि रेलवे यात्रियों को टिकट की मूल राशि ₹1876.80 आठ प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करे।

इसके अलावा:

  • ₹20,000 मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए मुआवजा
  • ₹15,000 मुकदमेबाजी खर्च

यानी कुल मिलाकर भारतीय रेलवे  को करीब ₹35 हजार का भुगतान करना होगा।

फोरम ने यह भी कहा कि 60 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करने पर भारतीय रेलवे को 10 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज भी देना पड़ेगा।

यात्रियों के अधिकारों पर बड़ा फैसला

यह फैसला उन लाखों रेल यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो कंफर्म टिकट होने के बावजूद सीट न मिलने की समस्या से जूझते हैं। उपभोक्ता फोरम के इस आदेश ने साफ कर दिया है कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना रेलवे की जिम्मेदारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद रेलवे को ट्रेन में सीट व्यवस्था और कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर और अधिक सतर्क रहना होगा।

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