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कश्मीर टाइम्स के जम्मू ऑफिस पर छापे: ‘राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में SIA की कार्रवाई तेज

AK-47 के 14 कारतूस, पिस्टल के राउंड और ग्रेनेड पिन बरामद; संपादकों ने कार्रवाई को बताया प्रेस को दबाने की कोशिश

जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने गुरुवार को कश्मीर टाइम्स के जम्मू स्थित ऑफिस पर बड़ी कार्रवाई करते हुए तलाशी ली। यह कार्रवाई अखबार के खिलाफ दर्ज उस केस के सिलसिले में हुई, जिसमें अखबार पर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों, देश के खिलाफ असंतोष फैलाने और अलगाववादी नैरेटिव को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए हैं।

तलाशी में हथियारों से जुड़ा सामान बरामद

सूत्रों के मुताबिक, SIA की तलाशी के दौरान ऑफिस से

  • AK-47 के 14 कारतूस,

  • कुछ पिस्टल राउंड,

  • और तीन हैंड ग्रेनेड के पिन
    बरामद किए गए।

हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब वर्ष 2020 में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कश्मीर टाइम्स के श्रीनगर स्थित ऑफिस को सील कर दिया था। 1954 में स्थापित यह अखबार प्रदेश का सबसे पुराना अंग्रेजी दैनिक माना जाता है, जिसकी स्थापना वेद भासिन ने की थी और वर्तमान में उनकी बेटी अनुराधा भासिन इसका संचालन करती हैं।


राजनीतिक हलचल: उप मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल, PDP ने भी की आलोचना

“पिक-एंड-चूज़ तरीके से मीडिया पर छापे नहीं पड़ने चाहिए” — सुरिंदर चौधरी

जम्मू-कश्मीर के उप मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एजेंसियों को अपना काम पारदर्शी तरीके से करना चाहिए।

उन्होंने कहा:
“अगर कार्रवाई होनी है तो निष्पक्ष हो। मीडिया पर सिर्फ दबाव बनाने के लिए छापेमारी नहीं होनी चाहिए। प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और उसे स्वतंत्र रूप से काम करने की जगह मिलनी चाहिए।”

वहीं, युवा PDP नेता आदित्य गुप्ता ने भी छापे की आलोचना करते हुए कश्मीर टाइम्स को जम्मू-कश्मीर की ‘सबसे बोल्ड आवाज़’ बताया।


कश्मीर टाइम्स ने छापे को बताया ‘स्वतंत्र मीडिया को चुप कराने की कोशिश’

“हमारी आलोचना को राष्ट्र-विरोधी कहना गलत”, अखबार के संपादकों का बयान

तलाशी के बाद कश्मीर टाइम्स के संपादकों—प्रबोध जम्वाल और अनुराधा भासिन—ने एक संयुक्त बयान जारी कर छापों की तीखी आलोचना की।

उन्होंने कहा:

“कश्मीर टाइम्स के ऑफिस पर हुई छापेमारी और हमारे खिलाफ लगाए गए झूठे आरोप स्वतंत्र मीडिया को दबाने की एक सुनियोजित कोशिश हैं। सरकार की आलोचना करना राष्ट्र-विरोधी होना नहीं है, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करना है।”

संपादकों का कहना है कि:

  • अखबार ने हमेशा स्वतंत्र पत्रकारिता को जिया है।

  • अधिकांश मीडिया के चुप रहने के दौर में भी सवाल पूछने और सत्ता को जवाबदेह बनाने का काम किया है।

  • कश्मीर टाइम्स ने हमेशा हाशिये पर पड़े लोगों की आवाज को जगह दी है।

उन्होंने आगे कहा कि:

“हमारा काम देश को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत करता है। लोकतंत्र में एक साहसी प्रेस आवश्यक है।”

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