एचडीएफसी बैंक पर भरोसा डगमगाया: भारी गिरावट से निवेशकों में बढ़ी चिंता
Mediawali news
देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक इन दिनों बाजार के दबाव में नजर आ रहा है। हाल ही में आई भारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार के कारोबार में बैंक का शेयर एक समय करीब 8% तक टूट गया, जिससे इसके मार्केट कैप में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दिन के आगे बढ़ने के साथ थोड़ी रिकवरी हुई और नुकसान घटकर करीब 66,000 करोड़ रुपये रह गया।
यह गिरावट केवल एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ सालों से शेयर में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है। एक समय 3700 रुपये से ऊपर पहुंच चुका यह शेयर अब काफी नीचे स्तर पर ट्रेड कर रहा है। इससे यह साफ होता है कि बाजार में निवेशकों का भरोसा पहले जैसा मजबूत नहीं रहा।
इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण बैंक की ग्रोथ को लेकर चिंता है। हाल के बिजनेस अपडेट और रिजल्ट उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, जिससे निवेशकों ने दूरी बनानी शुरू कर दी। इसके अलावा बैंक और एचडीएफसी लिमिटेड के विलय के बाद भी बाजार को जिस तेजी की उम्मीद थी, वह नजर नहीं आई। इससे भी शेयर पर दबाव बना।
इतिहास पर नजर डालें तो भारतीय रिजर्व बैंक के फैसलों का भी इस बैंक के शेयर पर असर पड़ा है। 2020 में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगाए गए बैन के बाद शेयर में गिरावट आई थी। वहीं कोरोना काल में भी निवेशकों ने बैंकिंग सेक्टर से दूरी बनाई थी।
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब बड़े निवेशक और ब्रोकरेज हाउस भी सतर्क नजर आ रहे हैं। मैक्वेरी जैसे संस्थानों ने फिलहाल इस शेयर पर स्पष्ट राय देने से परहेज किया है, जो बाजार में अनिश्चितता का संकेत है।
हालांकि, नकारात्मक खबरों के बीच यह भी ध्यान देने वाली बात है कि एचडीएफसी बैंक अभी भी पूंजी के लिहाज से देश के सबसे मजबूत बैंकों में शामिल है। इसकी बुनियादी स्थिति (फंडामेंटल्स) पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है, लेकिन ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही है।
मेरी राय में, यह गिरावट घबराने का नहीं बल्कि समझदारी से विश्लेषण करने का समय है। शॉर्ट टर्म में शेयर दबाव में रह सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म निवेशक बैंक की मजबूत स्थिति को नजरअंदाज नहीं कर सकते। आने वाले तिमाहियों में यदि बैंक अपने प्रदर्शन में सुधार करता है, तो निवेशकों का भरोसा फिर से लौट सकता है।