दक्षिण 24 परगना: मतदाता सूची के एसआईआर विवाद में सीईसी पर शिकायतें, अल्पसंख्यक वोटरों की भागीदारी पर सवाल
Mediawali news
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के जिबंतला थाने में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमारी के खिलाफ एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के दौरान कथित उत्पीड़न को लेकर सात शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इनमें कैनिंग पूर्व के विधायक Shaukat Molla के साथ स्थानीय नागरिक भी शामिल हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में उन्हें उत्पीड़ित किया गया। विधायक शौकत मुल्ला ने कहा कि उनके क्षेत्र में पिछले तीन दिनों में लगभग 33,000 नाम मतदाता सूची से हटाने की सिफारिश की गई, जिनमें 90 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हैं। उनका दावा है कि यह कदम वास्तविक मतदाताओं को वोट देने से रोकने और अल्पसंख्यक मतदाताओं की भागीदारी को कम करने की साजिश का हिस्सा है।
शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उचित सुनवाई के अवसर नहीं दिए गए और कई लोगों के दस्तावेजों को नजरअंदाज किया गया। मुल्ला ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई बीजेपी के पक्ष में काम करने वाले एक एजेंडा के तहत की जा रही है।
हालांकि, इस मामले में स्थानीय बीजेपी नेताओं ने सवाल उठाया है कि विधायक को कैसे यह जानकारी मिली कि मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं, जबकि ऐसी कोई आधिकारिक सूची प्रकाशित नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के प्रमुख के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद मतदाता सूची और एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित करने का मौका है। ऐसे मामलों में मतदाता सूची की सटीकता, अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप दोनों सामने आते हैं।
मतदाता सूची की सही निगरानी और शिकायतों का निष्पक्ष समाधान लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। वर्तमान विवाद इस बात की याद दिलाता है कि एसआईआर जैसी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सभी समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस मामले की जांच पुलिस कर रही है और सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना राज्य निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी बनी हुई है।