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दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के बीच पुराने वाहनों पर कड़ी कार्रवाई तेज

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 26 अक्टूबर तक 19,478 पुराने वाहनों (End-of-Life Vehicles) को जब्त किया गया। पिछले साल इसी अवधि में मात्र 5,035 वाहन ही जब्त किए गए थे। यह कार्रवाई अक्टूबर 15 से शुरू हुई और दिसंबर तक जारी रहेगी। अभियान में 10 साल से पुराने डीजल वाहन और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहन शामिल हैं। वाहनों के पास वैध Pollution Under Control (PUC) सर्टिफिकेट न होने पर जुर्माने में भी बड़ी बढ़ोतरी देखी गई। 26 अक्टूबर तक दिल्ली पुलिस ने 6,95,752 चालान जारी किए, जबकि पिछले साल इतनी ही अवधि में चालान केवल 3,19,045 थे। 

PUC सर्टिफिकेट न होने पर वाहन मालिकों को 2,000 रुपये जुर्माना देना पड़ता है। अगर वाहन से काला धुआं निकलता है तो अतिरिक्त 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। सबसे प्रदूषित वाहनों के खिलाफ यह कार्रवाई विशेष रूप से सख्त है। जिन वाहनों को जब्त किया जाता है, उन्हें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में निर्धारित स्क्रैपिंग केंद्रों (RVSFs) में भेजा जाता है। सबसे बड़ा केंद्र महिंद्रा MSTC रीसाइक्लिंग, ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन में है। इसके अलावा सोनीपत, सिकंदराबाद और नोएडा में भी स्क्रैपिंग सुविधाएं हैं।

दिल्ली सरकार ने 13 प्रमुख प्रदूषण वाले क्षेत्रों की पहचान की है, जिनमें नरेला, बावना, मुंडका, वजीरपुर, रोहिणी, आरके पुरम, औखला, जालंगीपुरि, आनंद विहार, पंजाबी बाग, मयापुरी और द्वारका शामिल हैं। हालांकि कार्रवाई तेज है और हजारों पुराने वाहन जब्त किए जा चुके हैं, फिर भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता गंभीर बनी हुई है। नागरिकों के लिए सांस लेना अब भी चुनौतीपूर्ण है।

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