दिल्ली दंगों UAPA केसः उमर खालिद, शरजील इमाम एवं गुलफिशा फातिमा ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत की मांग की, कहा 5 साल जेल में, हिंसा का कोई सबूत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश से जुड़े मामले में सुनवाई की, जिसमें उमर खालिद, शरजील इमाम और गुलफिशा फातिमा ने जमानत की मांग की है। ये तीनों UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत आरोपी हैं। मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजनिया की पीठ ने की। अदालत ने सुनवाई को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया ताकि अन्य सह-आरोपियों मीरन हैदर, मोहम्मद सलीम खान और शिफा-उर-रहमान और दिल्ली पुलिस की दलीलें भी सुनी जा सकें।
वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि गुलफिशा पिछले 5 साल 5 महीने से जेल में हैं, लेकिन अभी तक ट्रायल शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “अगर 6-7 साल बाद जमानत मिले तो उसका क्या मतलब?” उन्होंने यह भी बताया कि गुलफिशा के खिलाफ कोई हिंसक सबूत या वीडियो नहीं है, सिर्फ यह आरोप है कि उन्होंने महिलाओं को CAA विरोधी प्रदर्शन में शामिल किया। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उमर खालिद दंगों के समय दिल्ली में मौजूद ही नहीं थे। उनके खिलाफ कोई हथियार, धनराशि या हिंसक भाषण का सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन आरोपियों को पहले जमानत मिली, जैसे देवांगना कालिता, नताशा नरवाल और आसिफ इकबाल तनहा, वे सब उसी केस से जुड़े हैं।
वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि शरजील इमाम उस समय पहले से ही हिरासत में थे, जब दंगे हुए। उनके दो महीने पुराने भाषणों को गलत तरीके से उकसावे का आधार बताया गया है। सभी याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे लंबे समय से जेल में हैं, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट अब सोमवार को इस मामले पर आगे सुनवाई करेगा।