हिंद महासागर में चीन की बढ़ती हलचल: रिसर्च या रणनीतिक चाल?

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होर्मुज संकट के चलते दुनिया की नजरें होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हुई हैं, लेकिन इसी बीच चीन ने चुपचाप हिंद महासागर में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के तीन जहाज इस समय इस इलाके में सक्रिय हैं, जिन्हें वह “रिसर्च वेसल” यानी शोध जहाज बताता है, लेकिन कई विशेषज्ञ इन्हें जासूसी मिशन का हिस्सा मान रहे हैं।

इनमें सबसे नया जहाज शी यान 6 हाल ही में हिंद महासागर में दाखिल हुआ है। यह जहाज जावा और सुमात्रा के बीच स्थित सुंडा जलडमरूमध्य से होकर आया है और अब मालदीव की ओर बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि यह माले में रुककर अपने ऑपरेशन को अंजाम देगा।

दरअसल, पिछले कुछ समय में मालदीव चीन के लिए एक अहम समुद्री ठिकाना बनकर उभरा है। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए हैं, जिससे चीन को इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिला है।

चीन के दो और जहाज पहले से ही हिंद महासागर में सक्रिय हैं। दा यांग हाओ अफ्रीका के पास तक पहुंच चुका है, जबकि दा यांग यी हाओ भारत, पाकिस्तान और अरब सागर के बीच काम कर रहा है। ये जहाज समुद्र की गहराई, वहां की संरचना और खनिज संसाधनों की जानकारी जुटा रहे हैं।

अब सवाल यह उठता है कि इससे भारत को क्या फर्क पड़ता है? असल में, ऐसे जहाज समुद्र के नीचे का पूरा नक्शा तैयार कर सकते हैं। इससे भविष्य में पनडुब्बियों को सुरक्षित रास्ता मिल सकता है और वे बिना नजर में आए एक जगह से दूसरी जगह जा सकती हैं। यही वजह है कि भारत और अन्य देश इसे केवल वैज्ञानिक काम नहीं, बल्कि रणनीतिक गतिविधि के रूप में देख रहे हैं।

एक और अहम पहलू यह है कि जब पूरी दुनिया होर्मुज संकट में उलझी है, तब चीन इस मौके का फायदा उठाकर अपनी समुद्री ताकत को मजबूत कर रहा है। यह सीधे तौर पर हिंद महासागर में उसके प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश मानी जा रही है।

कुल मिलाकर, चीन की यह गतिविधि सिर्फ रिसर्च तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि इसके पीछे लंबी रणनीति हो सकती है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत और अन्य देश इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्षेत्र में संतुलन कैसे बनाए रखते हैं।

Anjali Priya
Anjali Priya
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