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बांग्लादेश में हिंदू नेता के चुनाव लड़ने पर रोक

शेख हसीना की सीट पर RSS से जुड़े गोबिंद का नामांकन खारिज, बोले– BNP की साजिश

ढाका:
बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। हिंदू नेता गोबिंद चंद्र प्रमाणिक को संसदीय चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। उन्होंने गोपालगंज-3 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया था, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने शनिवार को उनका नामांकन खारिज कर दिया।

गोपालगंज-3 सीट पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पारंपरिक सीट रही है, जहां 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदाता हिंदू हैं। बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव होने हैं।

कौन हैं गोबिंद चंद्र प्रमाणिक?

गोबिंद चंद्र प्रमाणिक पेशे से वकील हैं और बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत (BJHM) के महासचिव हैं। BJHM कुल 23 संगठनों का हिंदुत्ववादी गठबंधन है, जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा बताया जाता है।
गोबिंद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ना चाहते थे और उन्होंने दावा किया था कि उन्हें अपनी जीत पर पूरा भरोसा है।

1% हस्ताक्षर नियम बना विवाद की वजह

बांग्लादेश के चुनाव नियमों के अनुसार, किसी निर्दलीय उम्मीदवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र के कम से कम 1% मतदाताओं के हस्ताक्षर नामांकन के साथ जमा करने होते हैं।

गोबिंद का कहना है कि उन्होंने नियम के मुताबिक सभी हस्ताक्षर जमा किए थे, लेकिन बाद में उन मतदाताओं को दबाव में लाकर यह कहलवाया गया कि उनके हस्ताक्षर लिए ही नहीं गए।

BNP पर गंभीर आरोप

गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने आरोप लगाया कि खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकर्ताओं ने मतदाताओं पर दबाव बनाकर रिटर्निंग ऑफिसर के सामने बयान बदलवाया।
इसके बाद सभी हस्ताक्षरों को अमान्य घोषित कर उनका नामांकन रद्द कर दिया गया।

गोबिंद ने कहा,

“मेरी सीट पर 3 लाख मतदाता हैं, जिनमें 51% हिंदू हैं। BNP जानती थी कि यहां उसकी जीत की कोई संभावना नहीं है, इसलिए मुझे रास्ते से हटाया गया।”

उन्होंने चुनाव आयोग में शिकायत और जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाने की बात भी कही है।

BJHM और वैदिक स्कूलों का नेटवर्क

बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत (BJHM) देशभर में 350 से ज्यादा वैदिक स्कूल चलाता है। इन स्कूलों में बच्चों को भगवद गीता और अन्य हिंदू ग्रंथों की शिक्षा दी जाती है।

2023 में गोबिंद ने कहा था,

“हमारा लक्ष्य बचपन से ही हिंदू गौरव की भावना पैदा करना है। बांग्लादेश में हिंदू धर्म अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है।”

एक और हिंदू प्रत्याशी का नामांकन रद्द

गोबिंद के अलावा दुलाल बिसवास, जो गोनो फोरम पार्टी के उम्मीदवार हैं, उनका भी नामांकन रद्द कर दिया गया। हालांकि, उन पर 1% हस्ताक्षर नियम लागू नहीं होता था, लेकिन दस्तावेजों की कमी बताकर उनका पर्चा खारिज किया गया।
दुलाल बिसवास ने नए सिरे से दस्तावेज जमा करने की बात कही है।

वहीं, गोपालगंज-2 सीट से निर्दलीय हिंदू उम्मीदवार उत्पल बिस्वास चुनाव मैदान में हैं।

हसीना सरकार गिरने के बाद पहला बड़ा चुनाव

शेख हसीना की सरकार 5 अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन के बाद गिर गई थी। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा देकर भारत में शरण ली।
8 अगस्त 2024 को नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। अब 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव होने जा रहे हैं।

खालिदा जिया की पार्टी सबसे मजबूत

शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद BNP को सबसे ताकतवर पार्टी माना जा रहा है।
30 दिसंबर को खालिदा जिया का निधन हो गया था। अब पार्टी की कमान उनके बेटे तारिक रहमान के हाथ में है, जो 17 साल के निर्वासन के बाद हाल ही में बांग्लादेश लौटे हैं।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ते हमले

चुनाव से पहले बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसा भी बढ़ी है।
पिछले 15 दिनों में 4 हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। कई इलाकों में हिंदू घरों में आगजनी और हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे अल्पसंख्यकों में भय का माहौल है।

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