12 हजार साल बाद इथियोपिया में ज्वालामुखी फटा

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15 किमी ऊंचा राख का गुबार उठाः 4300 किमी दूर दिल्ली तक पहुंचा, कई उड़ानें रद्द

इथियोपिया के हेली गुब्बी ज्वालामुखी ने लगभग 12,000 साल की शांति के बाद अचानक विस्फोट किया। यह घटना न केवल अफ्रीका बल्कि एशिया तक असर छोड़ गई। ज्वालामुखी के फटने से उठा राख का गुबार लाल सागर पार करके यमन, ओमान और भारत के आसमान तक पहुंच गया।

राख 15 किमी ऊंचाई तक पहुँची

ज्वालामुखी के विस्फोट के बाद राख और सल्फर डाइऑक्साइड का बादल 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक उठ गया। यह धुआं तेज हवाओं के साथ यात्रा करता हुआ 4300 किलोमीटर दूर दिल्ली के आसमान तक भी पहुंच गया।

हालांकि अब यह राख भारत से हटकर चीन की दिशा में बढ़ रही है।

दिल्ली में उड़ानों पर असर, Air India ने 11 फ्लाइटें रद्द कीं

राख के गुबार के कारण कई एयरलाइनों ने सतर्कता बरती।

  • Air India ने 11 उड़ानें रद्द कीं

  • इंडिगो, अकासा और KLM ने भी कुछ रूटों पर उड़ानें रोकीं

  • DGCA ने तुरंत एयरलाइनों को चेतावनी और गाइडलाइन जारी कीं

राख के कण विमान के इंजन को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए इंटरनेशनल एविएशन प्रोटोकॉल के तहत उड़ान मार्ग बदले गए।

स्थानीय लोगों पर सीमित असर, लेकिन सावधानी जरूरी

यमन और ओमान में सरकारों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी, खासकर अस्थमा या सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को।

  • इस घटना में किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है।

  • हेली गुब्बी एक बेहद पुराना और शांत ज्वालामुखी माना जाता था, इसलिए वैज्ञानिक भी हैरान हैं।

DGCA की गाइडलाइन में क्या था?

DGCA ने उड़ानों और एयरपोर्टों के लिए निर्देश जारी किए:

  • राख वाले क्षेत्र के ऊपर फ्लाइट न भरें

  • उड़ान का रूट बदला जाए

  • अगर किसी विमान को राख छू जाए, तो तुरंत रिपोर्ट करना जरूरी

  • एयरपोर्ट को रनवे और टैक्सीवे की जांच करनी होगी

क्या आगे और विस्फोट हो सकते हैं?

वैज्ञानिकों ने चेताया है कि ज्वालामुखी द्वारा बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड रिलीज होना इस बात का संकेत है कि

  • ज्वालामुखी के अंदर दबाव बढ़ रहा है,

  • मैग्मा हिल रहा है,

  • और आगे अधिक विस्फोट संभव हैं।

एमिरात एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के प्रमुख इब्राहिम अल जरवान ने कहा कि यह घटना वैज्ञानिकों के लिए दुर्लभ अध्ययन का अवसर है।

विज्ञान के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?

हेली गुब्बी ज्वालामुखी अफार रिफ्ट का हिस्सा है, जहां धरती की टेक्टॉनिक प्लेटें अलग होती जा रही हैं।

  • इस इलाके में ज्वालामुखीय गतिविधि समझना भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है

  • हजारों साल शांत रहने वाले ज्वालामुखी के अचानक जागने से वैज्ञानिकों को भू-वैज्ञानिक बदलावों की नई जानकारी मिल सकती है

  • यह घटना अंतरराष्ट्रीय उपग्रह निगरानी और राख ट्रैकिंग सिस्टम की भी अहमियत दिखाती है

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