दिल्ली फिर गैस चैंबर में तब्दील — एयर क्वालिटी इंडेक्स 600 पार, नोएडा-गुरुग्राम में भी ‘सीवियर’ स्तर पर पहुंचा प्रदूषण
विशेषज्ञों की चेतावनी: बाहर निकलने से बचें, मास्क पहनें — बढ़ता प्रदूषण दिमाग और फेफड़ों को कर सकता है गंभीर नुकसान
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ती जा रही है। गुरुवार सुबह दिल्ली के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। बुराड़ी, आनंद विहार, एरोसिटी और बवाना जैसे क्षेत्रों में स्थिति सबसे खराब रही। सुबह 5:30 बजे दिल्ली का औसत AQI 601 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी से भी ऊपर है।
इसी समय नोएडा का AQI 503 और गुरुग्राम का 515 दर्ज किया गया, जबकि कई अन्य हिस्सों में भी वायु गुणवत्ता ‘सीवियर’ स्तर पार कर चुकी थी। विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में गिरावट और पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने के चलते नवंबर-दिसंबर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो जाता है, क्योंकि ठंडी हवाओं के कारण धुआं और धूल वातावरण में फंस जाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग लंबे समय तक बाहर निकलने से बचें और खुले स्थानों पर N95 मास्क का इस्तेमाल करें। अचानक बढ़े प्रदूषण स्तर से फेफड़ों, रक्त वाहिकाओं और मस्तिष्क पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, PM2.5 के उच्च स्तर से शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन बढ़ जाता है, जिससे C-reactive प्रोटीन और साइटोकाइन्स में वृद्धि होती है — जो शरीर में सूजन और तंत्रिका क्षति का संकेत है।
लंबे समय तक ऐसे प्रदूषण के संपर्क में रहने से दिमाग की सुरक्षात्मक परत (Blood-Brain Barrier) को नुकसान पहुंच सकता है और यह अल्जाइमर जैसी बीमारियों के शुरुआती लक्षण पैदा कर सकता है। इससे स्मरण शक्ति, सीखने की क्षमता और मनोभाव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।