राजपाल यादव बोले- ‘एक समय लगा मेरे लिए काम खत्म’, अब चेक बाउंस केस में मिली अंतरिम जमानत
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Rajpal Yadav News: बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव ने अपने करियर के मुश्किल दौर को याद करते हुए कहा था कि एक समय उन्हें लगा था कि अब उनके लिए काम ही नहीं बचा। इस बीच चेक बाउंस मामले में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से 18 मार्च तक अंतरिम जमानत मिल गई है।
हर सुबह 10 चुनौतियों के साथ उठता था…
एक पुरानी बातचीत में राजपाल यादव ने कहा कि 10 साल की उम्र से ही उन्होंने संघर्ष देखा है।
उन्होंने बताया कि ऐसा कोई दिन नहीं गया जब जीवन में चुनौती न रही हो—चाहे पारिवारिक हो, सामाजिक या करियर से जुड़ी।
उनके मुताबिक,
जिस रात सोया हूं, सुबह 10 चुनौतियों के साथ उठा हूं। लेकिन हर दिन नई शुरुआत मानकर आगे बढ़ा हूं।
OTT के दौर में लगा- ‘मैं फिट नहीं हूं’
राजपाल यादव ने कहा कि 2015 के बाद और खासकर कोरोना काल में जब OTT प्लेटफॉर्म का दौर बढ़ा, तब उन्हें डर लगने लगा था।
- वेब सीरीज में गाली-गलौज और अलग तरह का कंटेंट बढ़ा
- उन्हें लगा कि उनकी साफ-सुथरी कॉमेडी इस ट्रेंड में फिट नहीं होगी
- 3-4 साल तक उन्हें काम को लेकर असमंजस रहा
उन्होंने कहा कि अगर गालियों पर तालियां मिलें तो वह उनके लिए “अनफिट” होगा, क्योंकि उनकी पहचान परिवार के साथ बैठकर देखी जाने वाली कॉमेडी से रही है। हालांकि, बाद में वेब फिल्मों में काम के मौके मिलने लगे और उनका आत्मविश्वास लौटा।
कभी इस गलतफहमी में नहीं रहा…
राजपाल यादव ने साफ कहा कि वे कभी इस भ्रम में नहीं रहे कि उन्होंने बहुत कुछ हासिल कर लिया है।
उनके लिए हर दिन एक नई शुरुआत है और मेहनत जारी रखना ही सबसे जरूरी है।
चेक बाउंस केस में मिली अंतरिम जमानत
राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में तिहाड़ जेल में रहना पड़ा था। अब दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें 18 मार्च तक अंतरिम जमानत दे दी है।
कोर्ट की शर्तें:
- 1.5 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा
- दोपहर तक राशि जमा करने पर तुरंत रिहाई
- राशि जमा न करने पर जमानत रद्द
दरअसल, अभिनेता ने शाहजहांपुर में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए जमानत की याचिका लगाई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
संघर्ष से सीखा, हंसाना नहीं छोड़ा
राजपाल यादव उन कलाकारों में से हैं जो पर्दे पर लोगों को हंसाते हैं, लेकिन निजी जीवन में कई उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं।
OTT के दौर की चिंता हो या कानूनी मुश्किल—उन्होंने हर चुनौती को नई शुरुआत मानकर स्वीकार किया।