2030 तक भारत का फूड सर्विस मार्केट 11 लाख करोड़ पार करेगा
लेट-नाइट ऑर्डर, देसी व्यंजन और ग्लोबल फूड—सबकी डिमांड तेज
टियर-2 और टियर-3 शहरों में जेन-Z बन रहा ग्रोथ ड्राइवर
भारत में फूड सर्विस सेक्टर तेजी से बदल रहा है और आने वाले वर्षों में इसका विस्तार और अधिक बढ़ने वाला है। अनुमान है कि साल 2030 तक भारतीय फूड सर्विस मार्केट 11 लाख करोड़ रुपये (125 अरब डॉलर) के आंकड़े को पार कर देगा। दिलचस्प बात यह है कि इस उद्योग की वृद्धि में संगठित क्षेत्र का योगदान असंगठित क्षेत्र की तुलना में दोगुना तेज होगा। फिलहाल भारत का यह सेक्टर जीडीपी में 1.9% का योगदान देता है, जबकि चीन और ब्राजील में यह आंकड़ा इससे काफी अधिक है। इससे साफ है कि अभी भारत में विस्तार की भारी संभावनाएं बाकी हैं।
ग्राहकों की पसंद में तेजी से बदलाव, नए व्यंजन आज़माने का ट्रेंड मजबूत
खाने की पसंद और ऑर्डर पैटर्न में लोगों का रुझान लगातार बदल रहा है। रिपोर्ट बताती है कि ग्राहक अब अलग-अलग रेस्टोरेंट और क्यूज़ीन से डिश ट्राई करने में 30% तक ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। नए फ्लेवर और यूनिक डिशेज़ की खोज अब एक सामान्य व्यवहार बन चुका है।
लेट-नाइट फूड ऑर्डरिंग—डिनर से तीन गुना तेजी
रात 11 बजे के बाद खाने के ऑर्डर तेजी से बढ़ रहे हैं। पिज़्ज़ा, केक, कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स जैसे फूड आइटम सबसे अधिक बिक रहे हैं। वहीं हेल्दी थाली, हाई-प्रोटीन और लो-शुगर डाइट 2.3 गुना गति से लोकप्रिय हो रही है, जिससे साफ है कि ग्राहक टेस्ट के साथ हेल्थ का भी ध्यान रख रहे हैं।
देसी व्यंजन और पेय बने स्टार—ऐप से ऑर्डर हो रही चाय और जलजीरा
गैर-परंपरागत देसी व्यंजन जैसे बिहारी, पहाड़ी, गोवा, कूर्गी फूड मुख्यधारा के मुकाबले 2-8 गुना तेजी से बढ़ रहे हैं। छाछ, जलजीरा, शरबत जैसे पेय पदार्थों की डिमांड 6 गुना तक बढ़ी है। चाय की लोकप्रियता भी तीन गुना बढ़ी है—अब चाय की टपरी भी ऐप पर उपलब्ध है।
ग्लोबल फूड की घुसपैठ और नया स्वाद
कोरियन, मेक्सिकन, वियतनामी फूड की डिमांड क्रमशः 17 गुना, 6 गुना और 3.7 गुना बढ़ी है। सुशी, टैकोस और कोरियन BBQ अब मेट्रो सिटी के लिए आम विकल्प बन रहे हैं। स्टारबक्स, मैकडॉनल्ड्स जैसे ग्लोबल ब्रांड भारत के स्वाद अनुसार नए फ्लेवर पेश कर रहे हैं।
जेन-Z सबसे बड़ा ग्राहक आधार, टियर-2/3 शहरों की ग्रोथ तेज
टॉप-8 शहरों के बाहर डाइन-आउट की वृद्धि मेट्रो सिटीज़ से दोगुनी हो गई है। जेन-Z सोशल मीडिया के प्रभाव में कैफ़े-कल्चर को तेजी से अपना रहा है और फोटोजेनिक फूड, कॉफी-रेव, इंस्टा-फ्रेंडली रेस्तरां पसंद कर रहा है।
डिजिटल मार्केटिंग, प्री-बुकिंग और क्लाउड किचन बढ़ा रहे विस्तार
रेस्टोरेंट अब मार्केटिंग बजट का 75% डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खर्च कर रहे हैं। प्री-बुकिंग वॉक-इन से 7 गुना तेजी से बढ़ रही है, जबकि क्लाउड किचन और QSR लगभग 17% CAGR से आगे बढ़ रहे हैं। फूड डिलीवरी अनुभव में भी बदलाव आया है—”अनबॉक्सिंग स्टाइल”, हैंडी बिरयानी और क्रिएटिव पैकेजिंग इसके उदाहरण हैं।
फूड इंडस्ट्री आने वाले दशक में ग्राहकों की बदलती पसंद, डिजिटल ऑर्डरिंग और हाइपर-लोकल फ्लेवर के दम पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचने वाली है। भारत में खाने का भविष्य—स्वाद और सुविधा के नए अनुभवों के साथ और भी रोमांचक होने वाला है।