AI के दौर में बदल रही विधि शिक्षा, आईएमएस लॉ कॉलेज नोएडा में 5 दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ
Mediawali news, नोएडा
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) तेजी से शिक्षा, न्याय व्यवस्था और कॉर्पोरेट क्षेत्र का हिस्सा बन रही है। ऐसे समय में कानून पढ़ाने वाले शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए भी नई तकनीकों को समझना जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से आईएमएस लॉ कॉलेज, नोएडा में 13 से 17 जुलाई 2026 तक पांच दिवसीय वर्चुअल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का विषय “विधि शिक्षा एवं अधिगम में उभरती शिक्षण प्रवृत्तियां तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) संचालित उपकरणों का उपयोग” रखा गया है। कार्यक्रम में देश-विदेश के शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य शिक्षकों को बदलती तकनीक, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और AI आधारित कानूनी शोध एवं अभ्यास से जोड़ना है।
क्यों जरूरी हो गया है AI को समझना?
आज AI केवल चैटबॉट या ऑटोमेशन तक सीमित नहीं है। न्यायिक शोध, कानूनी दस्तावेज तैयार करने, अनुबंधों के विश्लेषण, कॉर्पोरेट अनुपालन (Compliance) और डेटा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी AI का तेजी से उपयोग बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में वकीलों, न्यायविदों और कानून के छात्रों के लिए AI की समझ उतनी ही महत्वपूर्ण होगी, जितनी संवैधानिक और विधिक ज्ञान की। इसी बदलती जरूरत को ध्यान में रखते हुए आईएमएस लॉ कॉलेज ने इस विशेष एफडीपी का आयोजन किया है।
पहले दिन AI और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर विशेष व्याख्यान
कार्यक्रम के पहले दिन सीए (डॉ.) अनुज कुमार गोयल ने “कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं कॉर्पोरेट गवर्नेंस: विधि शिक्षा, अनुसंधान एवं विधिक अभ्यास पर प्रभाव” विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि AI अब केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट गवर्नेंस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में विधि शिक्षकों और छात्रों को AI से जुड़े कानूनी, नैतिक और नियामकीय पहलुओं की गहरी समझ विकसित करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य का विधिक पेशा तकनीकी दक्षता और मानवीय विवेक के संतुलन पर आधारित होगा। इसलिए AI का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग और उससे जुड़े जोखिमों को समझना भी उतना ही जरूरी है।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप पहल
आईएमएस के सलाहकार प्रोफेसर (डॉ.) जे.के. शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था में तकनीक और कानून का समन्वय समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शिक्षकों को वैश्विक दृष्टिकोण, आधुनिक शिक्षण तकनीकों और AI आधारित टूल्स से परिचित कराते हैं। इससे विधि शिक्षा अधिक व्यावहारिक, शोध आधारित और समकालीन बनती है। कार्यक्रम में डीन सीआरसी एवं मैनेजमेंट डॉ. वर्तिका चतुर्वेदी, विभागाध्यक्ष डॉ. अंजुम हसन सहित विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों और शोधार्थियों ने भाग लिया।
AI के लाभ ही नहीं, जोखिमों पर भी होगी चर्चा
विभागाध्यक्ष डॉ. अंजुम हसन ने बताया कि इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में प्रतिभागियों को केवल AI के उपयोग ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े संभावित जोखिमों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम में निम्न विषयों पर विशेष चर्चा होगी—
- AI और विधि शिक्षा का भविष्य
- ऑटोमेशन बायस (Automation Bias)
- मॉडल ड्रिफ्ट (Model Drift)
- कॉर्पोरेट गवर्नेंस में AI की भूमिका
- कानूनी शोध में AI टूल्स का उपयोग
- डिजिटल डेटा सुरक्षा और गोपनीयता
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का होगा विश्लेषण
एफडीपी के दौरान प्रतिभागियों को AI से जुड़े विभिन्न कानूनी और नियामकीय ढांचों की भी जानकारी दी जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से—
- भारतीय कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 166 के अंतर्गत निदेशकों के दायित्व
- डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम
- इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के AI गवर्नेंस दिशा-निर्देश
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का नियामकीय ढांचा
- यूरोपीय संघ (EU AI Act) का AI कानून
इन विषयों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझाया जाएगा कि AI के बढ़ते उपयोग के साथ कानूनी जवाबदेही और डेटा सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण हो गई है।
भविष्य की विधि शिक्षा की नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कानून की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। AI, डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर कानून, डेटा प्रोटेक्शन और लीगल टेक्नोलॉजी जैसे विषय विधि शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगे। आईएमएस लॉ कॉलेज का यह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम इसी बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे शिक्षकों और शोधार्थियों को नई तकनीकों को समझने, उन्हें कक्षा में लागू करने और भविष्य की कानूनी चुनौतियों के लिए तैयार होने का अवसर मिलेगा।