वर्क फ्रॉम होम का झांसा देकर 70 से अधिक बेरोजगारों से ठगी, झारखंड से चल रहे फर्जी कॉल सेंटर गैंग का कैश मैनेजर नोएडा से गिरफ्तार
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नोएडा। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने वर्क फ्रॉम होम और निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर देशभर के बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी झारखंड से संचालित फर्जी कॉल सेंटर गिरोह का कैश मैनेजर बताया जा रहा है, जो म्यूल बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम निकालकर अपने साथियों तक पहुंचाता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी अब तक 70 से अधिक बेरोजगार युवाओं को ठगी का शिकार बना चुका है, जबकि उसके खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 25 शिकायतें दर्ज हैं। शुरुआती जांच में गिरोह द्वारा सैकड़ों लोगों से ठगी किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सोसायटी में छिपकर रह रहा था आरोप
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान प्रतिबिंब पोर्टल पर चिह्नित संदिग्धों की तलाश की जा रही थी। इसी बीच पुलिस को सूचना मिली कि नौकरी के नाम पर ठगी करने वाला एक आरोपी सेक्टर-23 स्थित एलिवेटेड रोड के नीचे अपनी कार में मौजूद है। सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपनी पहचान प्रशांत श्रीवास्तव (36) निवासी पटना, बिहार के रूप में बताई। वर्तमान में वह ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित सुपरटेक ईको विलेज-1 सोसायटी में रह रहा था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन और यूको बैंक तथा यूनियन बैंक के दो एटीएम कार्ड बरामद किए हैं।
मोबाइल जांच में मिले फर्जी जॉब ऑफर और अभ्यर्थियों का डेटा
पुलिस द्वारा आरोपी के मोबाइल फोन की जांच करने पर कई अहम साक्ष्य मिले हैं। इनमें व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, फर्जी जॉब ऑफर लेटर, ई-मेल स्क्रीनशॉट और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों का विस्तृत डेटा शामिल है। जांच में ऐसी कई रिकॉर्डिंग भी मिली हैं, जिनमें अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस और प्रोसेसिंग फीस जमा कराने की बातचीत की गई थी। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है और उसके अन्य साथियों की तलाश शुरू कर दी है।
फर्जी जॉब वेबसाइट बनाकर फंसाते थे बेरोजगारों को
पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह अपने साथी अमन अग्रवाल के साथ मिलकर विभिन्न डोमेन पर फर्जी जॉब वेबसाइट तैयार करता था। इन वेबसाइटों पर वर्क फ्रॉम होम, निजी कंपनियों में नौकरी और आकर्षक वेतन वाले विज्ञापन प्रकाशित किए जाते थे। झारखंड में संचालित कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियां नौकरी की तलाश कर रहे लोगों से संपर्क करती थीं और उनका डेटा मुख्य सरगना अमन अग्रवाल को भेजती थीं। इसके बाद गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों को नौकरी का भरोसा दिलाकर रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज के नाम पर रकम जमा करवाते थे।
झारखंड से भेजे जाते थे बैंक खाते, एटीएम और सिम कार्ड
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया है कि झारखंड निवासी नाज नामक महिला गिरोह को बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड उपलब्ध कराती थी। आरोपी प्रशांत इन बैंक खातों का इस्तेमाल कर ठगी की रकम निकालता था। उसने बताया कि खातों में पैसा आते ही वह एटीएम के जरिए नकदी निकाल लेता था और रकम का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा कैश डिपॉजिट मशीन के माध्यम से अपने साथी अमन अग्रवाल तक पहुंचा देता था। पुलिस कार्रवाई और शिकायतों से बचने के लिए गिरोह समय-समय पर बैंक खाते, मोबाइल फोन और सिम कार्ड बदल देता था।
नोएडा में भी बेरोजगार युवाओं को बनाता था शिकार
पुलिस के अनुसार, आरोपी नोएडा और आसपास के जिलों में भी सक्रिय था। वह सेक्टर-18, सेक्टर-23 सहित विभिन्न मेट्रो स्टेशनों और बस स्टॉप पर जाकर युवाओं से संपर्क करता था। आरोपी अपने पास नौकरी संबंधी आकर्षक पंपलेट रखता था और उन्हें बांटकर युवाओं से बातचीत शुरू करता था। इसके बाद बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूल ली जाती थी। पैसा मिलने के बाद आरोपी पीड़ितों के मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देता था।
पुलिस कर रही गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश
साइबर क्राइम पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं। पुलिस अब झारखंड में संचालित फर्जी कॉल सेंटर, मुख्य सरगना अमन अग्रवाल और अन्य सहयोगियों की तलाश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गिरोह ने अब तक देशभर में कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया है। पुलिस ने बेरोजगार युवाओं से अपील की है कि नौकरी के नाम पर किसी भी वेबसाइट या व्यक्ति को रजिस्ट्रेशन अथवा प्रोसेसिंग फीस देने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय पुलिस को दें।