सड़क हादसे में मौत के 3 महीने बाद दर्ज हुआ केस, कोर्ट के आदेश पर हरकत में आई पुलिस

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पीछे से अज्ञात वाहन ने मारी थी टक्कर, डिवाइडर से टकराकर चालक की हुई थी मौत; पीड़िता की शिकायत पर पहले नहीं हुई सुनवाई

नोएडा में सड़क दुर्घटना से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति की मौत के तीन महीने बाद कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। पीड़िता का आरोप है कि हादसे के दिन से ही वह थाने और पुलिस अधिकारियों के चक्कर काटती रही, लेकिन कहीं उसकी शिकायत नहीं सुनी गई। अंत में मजबूर होकर उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

क्या है पूरा मामला

सेक्टर-51 में रहने वाली गुड़िया देवी के पति विनय कुमार की 20 सितंबर को एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। गुड़िया देवी मूल रूप से गोंडा जिले के दलपतपुर की रहने वाली हैं और नोएडा के सेक्टर-51 होशियापुर में किराए के मकान में पति के साथ रहती थीं। विनय कुमार सेक्टर-39 स्थित एक कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करते थे।

कैसे हुआ हादसा

पीड़िता के अनुसार, 20 सितंबर की सुबह करीब 7 बजे विनय कुमार अपनी मालकिन की बेटी को सेक्टर-34 स्थित ट्यूशन क्लास छोड़ने गए थे। वहां से लौटते समय सेक्टर-51 के केंद्रीय विहार अपार्टमेंट के पास उनकी कार को पीछे से किसी अज्ञात वाहन ने तेज रफ्तार में टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में विनय कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

पुलिस पर लापरवाही का आरोप

गुड़िया देवी का आरोप है कि हादसे के दिन ही वह थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंची थीं, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत नहीं ली और टाल दिया। पति का अंतिम संस्कार करने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 31 अक्टूबर को उन्होंने डाक के माध्यम से पुलिस कमिश्नर को शिकायत पत्र भेजा। इसके बावजूद भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।

कोर्ट की शरण में गई पीड़िता

लगातार अनदेखी से परेशान होकर गुड़िया देवी ने आखिरकार कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सेक्टर-49 थाने की पुलिस को केस दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश के बाद अब जाकर तीन महीने बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

जांच शुरू, सीसीटीवी से आरोपी की तलाश

पुलिस का कहना है कि केस दर्ज होने के बाद अब जांच शुरू कर दी गई है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि उस अज्ञात वाहन और उसके चालक की पहचान की जा सके, जिसने पीछे से टक्कर मारी थी। पुलिस का दावा है कि जांच के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला एक बार फिर सवाल खड़े करता है कि पीड़ित परिवारों को न्याय पाने के लिए आखिर क्यों लंबा इंतजार करना पड़ता है और क्यों उन्हें कोर्ट तक जाना पड़ता है।

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