नोएडा से चोरी के मोबाइल झारखंड-बिहार होते हुए नेपाल पहुंच रहे, 821 मोबाइल के साथ 6 आरोपी गिरफ्तार
फेज-दो थाना पुलिस की बड़ी कार्रवाई
नोएडा में साप्ताहिक बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से मोबाइल चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। फेज-दो थाना पुलिस ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो नाबालिगों को पुलिस संरक्षण में लिया गया है। आरोपियों के पास से अलग-अलग कंपनियों के 821 चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 6 से 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
पुलिस टीम को 25 हजार का इनाम
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने इस बड़ी सफलता पर गिरोह का पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। अधिकारियों के अनुसार, यह हाल के वर्षों में जिले में मोबाइल फोन की सबसे बड़ी बरामदगी है।
कैसे हुआ गिरोह का खुलासा
डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि बीते कुछ महीनों से बाजारों, सब्जी मंडियों और भीड़भाड़ वाले स्थानों से मोबाइल चोरी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद एक विशेष टीम बनाई गई। मंगलवार को ककराला चौकी क्षेत्र में चेकिंग के दौरान कुछ संदिग्ध लोग पुलिस को देखकर पीछे मुड़ने लगे। शक होने पर पीछा कर छह बालिग और दो नाबालिगों को दबोचा गया, जिनके पास से भारी संख्या में चोरी के मोबाइल मिले।
गिरोह का सरगना बिहार का गोविंदा
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान झारखंड के साहिबगंज जिले के रहने वाले प्रदीप कुमार, शेखर महतो, भरतीया महतो और श्याम कुमार राय, मेरठ के मवाना निवासी रोहित सैनी और बिहार के भागलपुर निवासी गोविंदा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, 32 वर्षीय गोविंदा इस गिरोह का सरगना है। दो नाबालिगों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
भीड़ में दो सेकेंड में उड़ा देते थे मोबाइल
एडिशनल डीसीपी संतोष कुमार ने बताया कि गिरोह के सदस्य भीड़भाड़ वाले बाजारों में सक्रिय रहते थे। सर्दियों में जैकेट की जेब में रखे मोबाइल इनके आसान निशाने होते थे। आरोपी महज दो सेकेंड में मोबाइल चोरी कर उसे साथी को थमा देते थे। एक मिनट में मोबाइल कई हाथों से गुजर जाता था, जिससे शक होने पर भी असली चोर पकड़ में नहीं आता था।
झारखंड-बिहार से नेपाल तक सप्लाई
एसीपी उमेश यादव ने बताया कि जब आरोपियों के पास 500 से 1000 मोबाइल जमा हो जाते थे, तो वे ट्रेन या बस से झारखंड और बिहार पहुंचते थे। वहां कुछ मोबाइल स्थानीय स्तर पर बेच दिए जाते थे, जबकि कई मोबाइल महाराजगंज और अन्य रास्तों से नेपाल भेज दिए जाते थे, जहां चोरी के मोबाइल की अच्छी कीमत मिलती है।
नोएडा में किराये पर रहते थे आरोपी
पुलिस के अनुसार, आरोपी जब वारदात के लिए नोएडा आते थे, तो 5 से 8 हजार रुपये में किराये का कमरा लेते थे। शुरुआती दिनों में बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों की रेकी करते थे और फिर चोरी की घटनाएं शुरू कर देते थे।
डाटा के दुरुपयोग की आशंका
पुलिस का कहना है कि चोरी के मोबाइल नेपाल पहुंचने के बाद उनके डाटा का दुरुपयोग होने की आशंका है। मोबाइल में मौजूद निजी जानकारी का इस्तेमाल साइबर ठगी और देश विरोधी गतिविधियों में भी हो सकता है। इस एंगल से भी जांच की जा रही है।
जांच जारी, अन्य साथियों की तलाश
पुलिस सभी आरोपियों का आपराधिक इतिहास खंगाल रही है। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश भी की जा रही है। सेंट्रल नोएडा पुलिस का दावा है कि यह जिले में अब तक की सबसे बड़ी मोबाइल बरामदगी है।