मुंबई बुलाकर एक लाख का लालच, 20 वर्षीय युवक को ठगी गैंग में किया शामिल; तीन करोड़ की साइबर ठगी में अरेस्ट
शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा, करंट अकाउंट उपलब्ध कराने पर मिला कमीशन
नोएडा। शेयर ट्रेडिंग में मुनाफा कमाने का लालच देकर तीन करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक 20 वर्षीय युवक को बदायूं से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान आमेन्द्र शाक्य के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, ठगों ने उसे एक लाख रुपये का लालच देकर अपने गिरोह में शामिल किया और उसके नाम पर बैंक खाता खुलवाकर ठगी की रकम मंगवाई गई। पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है। इस मामले में पहले ही दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
सोशल मीडिया दोस्ती से शुरू हुई तीन करोड़ की ठगी
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि नोएडा निवासी एक व्यक्ति से सोशल मीडिया के जरिए एक महिला ने दोस्ती की थी। बातचीत के दौरान महिला ने शेयर ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा कमाने का झांसा दिया और धीरे-धीरे पीड़ित को निवेश के लिए तैयार कर लिया। इसके बाद अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए करीब तीन करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की गई।
दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद खुला तीसरे का नाम
जांच के दौरान पुलिस ने बदायूं से तेजपाल और रूपेंद्र नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में दोनों ने अपने एक अन्य साथी आमेन्द्र शाक्य के बारे में जानकारी दी। इसके आधार पर शुक्रवार को पुलिस ने आमेन्द्र को बदायूं से पकड़कर नोएडा लाया और पूछताछ की।
मुंबई जाकर खुलवाया करंट अकाउंट
पूछताछ में आमेन्द्र ने बताया कि तेजपाल उसके पड़ोस के गांव का रहने वाला है और उसका संपर्क मुंबई में बैठे साइबर ठगों से है। ये ठग निवेश के नाम पर लोगों से ठगी करते हैं और रकम मंगाने के लिए अलग-अलग लोगों के नाम पर करंट अकाउंट खुलवाते हैं। बदले में खाताधारक को कमीशन दिया जाता है।
लालच में आकर आमेन्द्र ने अपने दस्तावेज तेजपाल को दे दिए। इन दस्तावेजों से जीएसटी फर्म बनवाई गई और उसी के आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा में करंट अकाउंट खोला गया।
एक लाख रुपये का मिला लालच
पुलिस के मुताबिक, आमेन्द्र अपने खाते से जुड़े दस्तावेज लेकर तेजपाल के दोस्त रूपेंद्र के साथ मुंबई गया। खाता खुलवाने के बदले उसे पहले 50 हजार रुपये दिए गए। वह करीब सात दिन मुंबई में रुका और एक सप्ताह बाद उसे 50 हजार रुपये और दिए गए। इस तरह अपने करंट अकाउंट के बदले आमेन्द्र को कुल एक लाख रुपये मिले।
खाते में आए थे एक करोड़ रुपये
विवेचना में सामने आया कि आमेन्द्र के खाते में करीब एक करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए थे। यह पूरी रकम साइबर ठगी से जुड़ी थी। जब खाते को एनसीआरपी पोर्टल पर जांचा गया तो उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना समेत अन्य राज्यों से पांच शिकायतें दर्ज मिलीं। पुलिस का कहना है कि आमेन्द्र ने अपने कुछ और साथियों के नाम भी बताए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
कोर्ट में पेश कर भेजा गया जेल
पुलिस ने आमेन्द्र को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। साइबर क्राइम थाना पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।
साइबर पुलिस की जनता से अपील
एडिशनल डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए निवेश से जुड़े ईमेल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें। टेलीग्राम या व्हाट्सऐप के अनजान निवेश ग्रुप से दूरी बनाए रखें। शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ में निवेश केवल अधिकृत बैंक या विश्वसनीय डीमैट सेवा प्रदाताओं के माध्यम से ही करें।