कर्ज में डूबा ऑपरेशन थिएटर सहायक बना साइबर ठगों का साथी, गिरफ्तार
- कमीशन के लालच में दे दिया बैंक खाता, नोएडा में 2.10 करोड़ की ठगी से जुड़ा निकला
नोएडा में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हुई 2.10 करोड़ रुपये की ठगी मामले में साइबर थाना पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला है। वहीं पर एक निजी अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में सहायक के तौर पर नौकरी करता था। कुछ दिनों पहले कर्ज की वजह से उसे लोन लेने की आवश्यता पड़ी, इसके बाद एक युवक के माध्यम से वह साइबर ठगों से जुड़ गया। कमीशन के बदले ठगी की रकम अपने खाते में मंगवाता था। पुलिस जांच में सामने आया है कि उसके खाते के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों से आठ शिकायतें दर्ज हुई हैं। वहीं अब तक आरोपी के बैंक खाते में कुल 19 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन की पुष्टि हुई है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की पहचान अमन कुमार (26) हरियाणा जनपद चरखी दादरी के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में उसने जानकारी दी है कि वह सिर्फ 10वीं पास है और एक निजी अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में हेल्पर की नौकरी करता था। उसे लोन की आवश्यकता थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात मेरी रूपेश नाम के युवक से हुई। जो लोन दिलाने का काम करता था। झांसे में लेने के बाद अमन के नाम पर करंट खाता खुलवाया। नोएडा में 10 अप्रैल को डिजीटल अरेस्ट कर ठगी मामले की रकम आरोपी के बैंक खाते करीब 2.20 लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे। इसके बैंक खाते के खिलाफ उत्तर प्रदेश 1, केरल 1, राजस्थान 1, गुजरात 1, कर्नाटक 1 व महाराष्ट्र 3 शिकायत दर्ज है। वहीं पुलिस को आशंका है कि आरोपी और भी बैंकों में खाते खुलवाया होगा। जिसकी जानकारी जुटा रही है। साथ ही उसके साथियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में था और साइबर गैंग का नेटवर्क कहां तक फैला हुआ है।
साइबर ठगों ने एनआईए पुणे का अधिकारी बताकर ठगे थे रुपये
साइबर अपराधियों ने खुद को एनआईए पुणे का अधिकारी बताकर नोएडा निवासी एक व्यक्ति को फोन किया। ठगों ने उसके आधार कार्ड से जुड़े बैंक खातों के टेरर फंडिंग में इस्तेमाल होने का डर दिखाया और गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके बाद वॉट्सऐप पर आरबीआई के नाम से फर्जी पत्र और वारंट भेजे गए। लगातार डर और दबाव बनाकर पीड़ित से 2.10 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। पीड़ित की शिकायत पर थाना साइबर क्राइम में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस पहले ही दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध रकम को इधर-उधर करने के लिए करता है। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है।
साइबर ठगों : म्यूल अकाउंट की तरह करते हैं इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार आरोपी के बैंक खाते में अब तक करीब 19 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। साइबर ठग उसके खाते का इस्तेमाल म्यूल अकाउंट की तरह कर रहे थे। आसान भाषा में समझें तो ऐसे खाते ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं ताकि असली अपराधियों तक पुलिस आसानी से न पहुंच सके। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी सीधे तौर पर लोगों को फोन कर ठगी नहीं करता था, लेकिन उसने पैसों के लालच में अपना बैंक खाता अपराधियों को इस्तेमाल करने दिया। इसी वजह से वह भी साइबर अपराध की कड़ी में शामिल हो गया।
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