साइबर ठगों ने एक कारोबारी से क्रिप्टो ट्रेडिंग में निवेश के बहाने 12.50 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित के वॉट्सऐप पर अनजान नंबर से मेसेज आए। पीड़ित से बातचीत के बाद ठग ने खुद को शेयर मार्केट के एक्सपर्ट बताने वाले लोगों से बात कराई। इसके बाद उन्हें एक वॉट्सऐप ग्रुप में जोड़ लिया। उसमें क्रिप्टो ट्रेडिंग में निवेश प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही एक पोर्टल पर उनका रजिस्ट्रेशन कराया गया। झांसे में आने के बाद पीड़ित ने आठ बार में 12.50 लाख रुपये ठगों के खाते में ट्रांसफर कर दिए। कारोबारी ने मुनाफे की रकम निकालने की कोशिश की तो उनसे 10 लाख रुपये और मांगे गए, तब जाकर उन्हें ठगी की जानकारी हुई। इस मामले में साइबर थाना पुलिस केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सेक्टर-63 निवासी गोविंद अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि इसी साल 6 फरवरी को उन्हें एक वॉट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया। ग्रुप में खुद को विशेषज्ञ ट्रेडर बताने वाले लोग क्रिप्टो ट्रेडिंग से मोटे मुनाफे का दावा कर रहे थे। पीड़ित को बताया गया कि हर ट्रेड पर 30 डॉलर का कमीशन मिलेगा और निवेश पर आकर्षक रिटर्न प्राप्त होगा। शुरुआत में ग्रुप में मुनाफे के स्क्रीनशॉट और अन्य सदस्यों के कथित लाभ दिखाकर भरोसा कायम किया गया। इसके बाद 8 फरवरी से 12 फरवरी के बीच पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 12.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। निवेश के बाद जब उन्होंने अपनी रकम निकालने की कोशिश की तो उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला। उल्टा ठगों ने रकम जारी करने के लिए अतिरिक्त 10 लाख रुपए जमा करने की मांग शुरू कर दी। शक होने पर पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। बाद में साइबर थाने में औपचारिक एफआईआर दर्ज कराई गई।
ऐसे बचें ऑनलाइन निवेश ठगी से
निश्चित मुनाफे के दावों से सावधान रहें। शेयर बाजार या क्रिप्टो में निश्चित लाभ का कोई भरोसा नहीं होता। अनजान व्हाट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप पर भरोसा न करें।किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म की सेबी या संबंधित नियामक से वैधता जांचें। व्यक्तिगत बैंक खातों में निवेश राशि ट्रांसफर न करें।फर्जी ऐप और लिंक डाउनलोड करने से बचें। पहले छोटे भुगतान और त्वरित निकासी दिखाकर भरोसा जीतने की चाल को पहचानें। निकासी के बदले टैक्स, कमीशन या अतिरिक्त जमा राशि की मांग हो तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
ठगी होने पर यहां करें शिकायत
ठगी का संदेह होते ही 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि लालच, जल्द मुनाफे की चाह और बिना सत्यापन निवेश करना ऐसे गिरोहों का सबसे बड़ा हथियार है। सतर्कता और समय पर शिकायत ही आर्थिक नुकसान को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।