कॉल सेंटर में काम करते हुए मिला आइडिया, 24 साल की युवती ने बनाया ठगी का नेटवर्क

किराए पर कमरा, निजी सॉफ्टवेयर… और कुछ ही महीनों में बन गई करोड़पति

Share your love
पुलिस ने सेक्टर-2 में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया

फेज-1 थाना पुलिस ने गुरुवार को एनआरआई को सस्ते सब्सक्रिप्शन देने के नाम पर ठगी करने वाले एक कॉल सेंटर का खुलासा किया। इस कॉल सेंटर को महज 24 साल की एक युवती तनिष्का वर्मा संचालित कर रही थी। पुलिस ने मौके से 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि यह गिरोह अब तक लाखों लोगों को निशाना बना चुका है।

कॉल सेंटर की नौकरी से ही मिला ठगी का आइडिया

पुलिस के अनुसार, तनिष्का ने 2023 में बीए पूरा करने के बाद एक कॉल सेंटर में काम शुरू किया था। वहीं उसकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जिसने उसे निजी सॉफ्टवेयर की मदद से एनआरआई को ठगने का तरीका सिखाया।
आठ महीने बाद तनिष्का ने अपनी नौकरी छोड़ दी और उसी मॉडल पर अपना कॉल सेंटर खोलने का निर्णय लिया।

सेक्टर-2 में किराए पर कमरा लेकर खड़ा किया ठगी का साम्राज्य

तनिष्का ने मथुरा के वृंदावन निवासी अनिल बघेल (28) के साथ मिलकर प्लान बनाया।

  • सेक्टर-2 में किराए पर जगह ली

  • सिस्टम खरीदे

  • कॉलिंग के लिए 15 युवतियों को 15–20 हजार रुपये वेतन पर रखा

  • तकनीकी काम के लिए बिहार और अन्य राज्यों से 25–30 हजार रुपये वेतन पर युवक भर्ती किए

पुलिस की जांच में पता चला है कि तनिष्का के बैंक खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर हुए हैं। अकाउंट फ्रीज कर जांच जारी है।

डार्कवेब से खरीदा जाता था एनआरआई का डेटा

पूछताछ में युवती ने चौंकाने वाले खुलासे किए—

  • डार्क वेब और फर्जी साइट्स से पैसे देकर एनआरआई मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया डेटा खरीदा जाता था

  • 15 कॉलिंग स्टाफ इस डेटा का इस्तेमाल कर लोगों से संपर्क करते थे

  • उन्हें फर्जी सॉफ्टवेयर और सब्सक्रिप्शन का लालच दिया जाता था

  • वीडियो कटिंग मास्टर और एडिटर्स OTT से वीडियो काटकर स्ट्रीमिंग करते थे ताकि सब्सक्रिप्शन “रियल” लगे

पार्टनर को बचाने की कोशिश करती रही युवती

एक अधिकारी ने बताया कि तनिष्का बेहद प्रोफेशनल तरीके से बात करती है।
छापे के दौरान उसका पार्टनर अनिल बघेल भी मौजूद था, लेकिन युवती ने पुलिस को लगातार गुमराह करने की कोशिश की और कहा कि अनिल का कॉल सेंटर से कोई संबंध नहीं है।
कड़ी पूछताछ के बाद उसने सच कबूल किया।

फर्जी कॉल सेंटर के जरिए हजारों एनआरआई बने शिकार

पुलिस का दावा है कि इस कॉल सेंटर के माध्यम से युवती और उसके साथियों ने लाखों एनआरआई से करोड़ों की ठगी की है।
सॉफ्टवेयर किस देश का है और इस रैकेट के अन्य सदस्य कौन हैं—पुलिस अब इसकी जांच में जुटी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
News
Videos
Audios
Work With Us