किराया बढ़ा, गैस महंगी… फिर सैलरी क्यों नहीं?

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Mediawali news, Noida

नोएडा। नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में कर्मचारियों का प्रदर्शन अब सिर्फ वेतन बढ़ाने की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह महंगाई और न्यूनतम वेतन को लेकर बड़ा मुद्दा बन गया है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि जब कमरे का किराया, गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, तो सैलरी में इजाफा क्यों नहीं किया जा रहा है। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने बोला कि संसद में वित्त मंत्री सीतारमण ने अनस्किल्ड 20 हजार और स्किल्ड कर्मचारियों को 24 हजार रुपये वेतने देने के लिए बोला है। ये कंपनी वाले उस नियम को क्यों नहीं लागू कर रहे हैं। वहीं उनका कहना है कि सभी कंपनियों में लेबर कोड लागू हो और श्रमिक विभाग का एक कर्मचारी तैनात किया जाए। जिससे वो लोग अपनी समस्याए बता सके। क्योंकि यह कंपनी वाले उन लोगों को शोषण करते हैं।

सेक्टर 82 फेज टू में प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बोला कि कंपनियां सरकार और श्रम कानूनों के निर्देशों का पालन नहीं कर रही हैं। इन कंपनियों में अनस्किल्ड कर्मचारियों को 8 घंटे की ड्यूटी के लिए करीब 11 से 13 हजार रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि स्किल्ड कर्मचारियों को लगभग 16 से 18 हजार रुपये सैलरी मिल रही है। वहीं रविवार और अन्य दिनों की छुट्टी के तनख्वाह में काटी जाती है। कर्मचारियों का कहना है कि इतनी कम सैलरी में गुजारा करना मुश्किल हो गया है। कर्मचारी ने बताया कि कमरे का किराया 3 हजार से बढ़कर 5 हजार रुपये तक पहुंच गया है। वो लोग बाहर से आकर नोएडा में नौकरी करते हैं। जिस वजह से उन्होंने गैस कनेक्शन पास नहीं कराया है। पहले उन्हें 90 रुपये किलो गैस मिल रही थी। वहीं अब प्रति किलो पर गैस के दाम बढ़कर 350 रुपये हो गए हैं। साथ ही खाने-पीने की चीजों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में 11 हजार या 18 हजार रुपये में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो रहा है। महिलाओं ने बच्चों की फीस और उनके भविष्य को लेकर चिंता जताई।

8 घंटे की ड्यूटी बताकर कराते हैं 10 घंटे काम

कर्मचारियों ने कहा कि सेक्टर 82 में अधिकतर कंपनियों में कपड़ा सिलाई, इलेक्टॉनिक डिवाइस बनती हैं। उन्हें नौकरी 8 घंटे की नौकरी पर 11 रुपये वेतन देने की बात कही गई। इसके बाद कई जगहों पर कर्मचारियों से 10 से 12 घंटे काम कराया जाता है, लेकिन भुगतान 8 घंटे का ही मिलता है। इसी वजह से कर्मचारियों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं सैलरी को दो भागों में बांटकर दिया जाता है। उनका कहना है कि सैलरी बढ़ा दी जाए और घंटों के हिसाब से सैलरी दी जानी चाहिए।

 

मेरा नाम आकाश पांडेय है। मैं आगरा का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 25 साल है और मैं इलेक्ट्रिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी में नौकरी करता हूं। मेरी सैलरी 13 हजार 200 रुपये महीने की है। साथ आठ घंटे के बजाय, हमें 9 से 10 घंटे ड्यूटी कराई जाती है। हम चाहते हैं कि 20 हजार रुपये तक सैलरी बढ़ाई जाए। क्योकिं हम लोगों पर भी घर परिवार की जिम्मेदारी है। इतने पैसे में नोएडा जैसे शहर में गुजर बसर नहीं हो पाता है।

 

मेरा नाम रविश चौधरी है। मेरी सैलरी 14 हजार रुपये है। भंगेल में पांच हजार रुपये किराए के कमरे पर रहता हूं। पिछलि दिनों से गैस के दाम भी बढ़ गए हैं। हम लोग बस सरकार द्वारा लागू किए गए न्यूनतम वेतन ही मांग कर रहे हैं। हमें लिखित में दे दिया जाए, अभी प्रदर्शन स्थल से हट जाएंगे।

 

सलारपुर में रहने वाली नीतू देवी ने बताया कि उनकी सैलरी 13 हजार 580 रुपये महीने है। वह सिलाई का काम करती हैं। वो बोलीं कि हरियाणा में इसी तरह मजदूरों ने प्रदर्शन किया तो उनकी सैलरी बढ़ा दी गई तो यूपी सरकार सैलरी क्यों नहीं बढ़वा रही है। कमरे और गैस के दाम बढ़ गए हैं सैलरी भी बढ़नी चाहिए।

 

याकूबपुर निवासी शिल्पी देवी ने बताया कि वह सेक्टर 82 की कंपनी में सिलाई का काम करती हैं। उनकी सैलरी 13 हजार रुपये महीना है। दो बच्चे हैं। उनकी कापी और फीस करीब 8 से 9 हजार रुपये प्रति महीने खर्च होते हैं। अब इनती सैलरी में हम लोग अपने बच्चों को किसी अच्छे स्कूल में नहीं पढ़ा पा रहे हैं। क्या सरकार चाहती है कि हम लोग मजदूर रहे गए तो हमारे बच्चे भी मजदूरी करें।

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