Kanpur: खेरेश्वर मंदिर मेला भूमि पर कब्जे का आरोप, वीडियो से बढ़ी चिंता
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Mediawali news, कानपुर
सावन का महीना शुरू होते ही कानपुर के शिवराजपुर स्थित प्रसिद्ध खेरेश्वर मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के आने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लेकिन इस बार धार्मिक आस्था से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थल को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में मंदिर प्रांगण की कथित मेला भूमि पर निर्माण कार्य होता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि उस स्थान का सवाल है जहां वर्षों से सावन मेले के दौरान दूर-दराज के जिलों से आने वाले श्रद्धालु ठहरते हैं। यदि मेला भूमि पर लगातार निर्माण होता रहा, तो भविष्य में श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त स्थान नहीं बचेगा और वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा प्रभावित हो सकती है।
क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि खेरेश्वर मंदिर प्रांगण की भूमि पर कुछ लोगों द्वारा निर्माण कार्य कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित भूमि पर पहले भी निर्माण रोकने के लिए राजस्व विभाग कार्रवाई कर चुका है। ग्रामीणों के अनुसार, पहले अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवाया था और दोबारा निर्माण होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। इसके बावजूद दोबारा निर्माण शुरू होने के आरोप सामने आए हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
सिर्फ जमीन नहीं, आस्था का भी सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि खेरेश्वर मंदिर केवल शिवराजपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष सावन के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने, विश्राम करने और धार्मिक गतिविधियों के लिए मंदिर परिसर के आसपास की खुली भूमि महत्वपूर्ण मानी जाती है। लोगों का कहना है कि यदि इस स्थान पर स्थायी निर्माण हो गया, तो भविष्य में मेले के आयोजन में कठिनाई आ सकती है।
सावन मेले का धार्मिक और सामाजिक महत्व
खेरेश्वर मंदिर में लगने वाला सावन सोमवार का मेला क्षेत्र की पुरानी धार्मिक परंपराओं में शामिल है। सावन के प्रत्येक सोमवार को बड़ी संख्या में कांवड़िए और शिवभक्त यहां पहुंचते हैं। स्थानीय व्यापारियों के लिए भी यह मेला रोजगार का बड़ा माध्यम बनता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे धार्मिक स्थलों के आसपास की सार्वजनिक और मेला भूमि का संरक्षण आवश्यक है, ताकि भविष्य में श्रद्धालुओं की सुविधाएं प्रभावित न हों।
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राजस्व विभाग ने क्या कहा?
मामले में क्षेत्रीय लेखपाल देवेंद्र यादव ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से सूचना मिली है कि संबंधित भूमि पर कब्जा कर बोरिंग कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी। यदि जांच में राजस्व अभिलेखों के विपरीत कोई अवैध निर्माण या कब्जा पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
लोगों की मांग- मेला भूमि को कराया जाए सुरक्षित
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर और मेला भूमि का सीमांकन कराकर उसे सुरक्षित किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भूमि विवाद और बढ़ सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सावन मेले जैसी ऐतिहासिक धार्मिक परंपराएं किसी भी प्रकार के अतिक्रमण से प्रभावित न हों।
जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल मामला जांच के अधीन है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर राजस्व विभाग ने जांच शुरू करने की बात कही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित भूमि पर निर्माण वैध है या अवैध। तब तक प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास न करें और आधिकारिक जांच पूरी होने का इंतजार करें।