हैदराबाद के निजी अस्पताल में केस खराब होने के बाद 6 महीने पहले आया नोएडा
फोटो है।
Mediawali news, नोएडा
डेटिंग साइट और फ्रेंड ऐप पर नाम बदलकर ठगी करने वाले एक बेरोजगार एमबीबीएस, एमडी डॉक्टर को साइबर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी हैदराबाद के निजी अस्पताल में केस खराब होने के बाद नोएडा आकर ग्रेटर नोएडा के चाई फाई सोसायटी में किराए के फ्लैट में रहने लगा। साइबर जागरूकता कार्यक्रम देखने के बाद उसने इंटरनेट से ठगी करने का तरीका सीखा। झांसे में आए पीड़ितों से सोशल मीडिया और फोन पर लड़की की आवाज में आरोपी प्यार-मोहब्बत की बाते करता था और उन्हें निवेश करने की सलाह देकर ठगी में जुट गया। पुलिस ने उसके पास से ठगी में इस्तेमाल की गई मोबाइल कब्जे में लिया और दो बरामद कुत्तों को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के शेल्टर होम को सौंप दिया है।
पुलिस ने बताया कि उसकी पहचान डॉक्टर रामाकृष्ण पेदगावेगी (37) एमबीबीएस, एमडी निवासी आंध्र प्रदेश के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि प्रतिबिंब पोर्टल पर कई शिकायतें मिली, जिसमें सैयद अय्युब इमरान के नाम के व्यक्ति से पुलिस ने संपर्क किया। उससे निवेश के नाम पर उनसे 4.40 लाख रुपये ठगी हुई थी। जांच के दौरान पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों और बैंक खाते की जानकारी जुटाई। तकनीकी जांच और सीडीआर के आधार पर पता चला कि मोबाइल नंबर और बैंक खाते का लिंक आंध्र प्रदेश के रहने वाले रामाकृष्ण पेदगावेगी से जुड़ा है। मोबाइल की लोकेशन ग्रेटर नोएडा की चाई-5 स्थित प्रोव्यू टेक्नो सिटी सोसायटी के आसपास मिली। इसके बाद पुलिस टीम वहां पहुंची। इसके बाद रामाकृष्ण पेदगावेगी को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से एक मोबाइल बरामद हुआ। जोकि इसी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर पीड़ितों से बातचीत की गई थी। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
पुलिस से बचने के लिए अपनाया नया तरीका, कार्यक्रम देखकर बना ठग
पुलिस से बचने के लिए एक साइबर ठग ने नया तरीका अपनाया। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि कुछ समय पहले उसने साइबर जागरूकता कार्यक्रम देखा था। कार्यक्रम में पुलिस लोगों को ठगी से बचने के तरीके बता रही थी। इसी दौरान उसकी दिलचस्पी साइबर अपराध में बढ़ी और उसने इंटरनेट का सहारा लिया। आरोपी ने गूगल और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साइबर ठगी से जुड़े तरीके खोजे और उन्हें सीखना शुरू कर दिया। इसके बाद उसने लोगों को झांसे में लेने और अपनी पहचान छिपाने के नए तरीके अपनाए। फ्रेंड ऐप और डेटिंग साइट पर महिला बनाकर लोगों से संपर्क करना सीखा। एक पीड़िता का बैंक खाता दूसरे पीड़ित से ठगी करने लगा। आरोपी लगातार अलग-अलग मोबाइल नंबर और बैंक खातों का इस्तेमाल करता था, ताकि पुलिस आसानी से उसके तक न पहुंच सके।
श्रीशा नाम की लड़की बनकर करने लगा ठगी
आरोपी एमबीबीएस, एमडी की पढ़ाई पूरी करने के बाद आंध्र प्रदेश (हैदराबाद) के एक निजी अस्पताल में सर्जन डॉक्टर के रूप में नौकरी करने लगा। 8 से 9 महीने पहले अस्पताल में एक केस खराब होने के बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद वह 7 महीने नोएडा आया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह इस समय बेरोजगार है। खर्च चलाने के लिए उसने श्रीशा नाम की लड़की लोगों से दोस्ती करता था। झांसे में आए लोगों से यूनियन बैंक के खाते में पैसे ट्रांसफर करवा लेता था। जब पीड़ितों मुनाफे की रकम और मूल धन वापस मांगते थे तो वह फोन उठाना बंद कर देता था।
मूल खाताधारक वर्शित वर्मा, पुलिस तलाश में जुटी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जिस बैंक खाते में पैसे मंगवाता था, उसका मूल खाताधारक वर्शित वर्मा है। आरोपी ने उसे भी लड़की बनकर अपने प्रेमजाल में फंसाया था और बहाने बनाकर खाते में अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर करा लिया था। इसके बाद खाते का एक्सेस अपने पास रखकर उसका इस्तेमाल साइबर ठगी में करने लगा। पुलिस वर्शित वर्मा की तलाश शुरू कर दी है। आरोपी ने पुलिस को बताया कि बैंक खाते से जुड़ा दूसरा मोबाइल फोन उसने डर के कारण फेंक दिया था। पुलिस को आरोपी के मोबाइल से शिकायतकर्ता के साथ हुई चैट भी मिली है।
छह महीने में तीन बार बदल चुका है फ्लैट
पुलिस ने बताया कि आरोपी का सोसायटी निवासियों से कई बार झगड़ा कर चुका है। वह अविवाहीत है। फ्लैट में अकेला रहता था। उसने दो कुत्ते भी पाल रखे थे। आरोपी छह महीने में तीन बार फ्लैट बदल चुका है। साइबर थाना पुलिस को उसके संदिग्ध होने पहले भी जानकारी मिल चुकी थी। लेकिन कोई शिकायत नहीं होने पर कार्रवाई नहीं की। वहीं आरोपी सोसायटी किसी निवासियों से बातचीत नहीं करता था।