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कानपुर: टोल प्लाजा के पास युवकों को उठाने व थर्ड डिग्री के आरोप की जांच

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कानपुर के बिल्हौर तहसील अंतर्गत शिवराजपुर थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। क्षेत्र के दो युवकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें नेवादा टोल प्लाजा के पास से सादी वर्दी में आए लोगों ने जबरन वाहन में बैठाकर अज्ञात स्थान पर ले जाकर घंटों तक रखा और उनके साथ थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करते हुए बेरहमी से मारपीट की गई। मामले की शिकायत डीसीपी पश्चिम एस. एम. कासिम आबिदी से की गई है, जिन्होंने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।

टोल प्लाजा के पास से जबरन उठाने का आरोप

पीड़ित विनय पाल निवासी सांवलपुर बेहटा और उसके साथी सत्यम ने डीसीपी पश्चिम को दी गई तहरीर में बताया कि बुधवार सुबह वे दोनों शिवराजपुर थाना क्षेत्र स्थित नेवादा टोल प्लाजा के पास खड़े थे। इसी दौरान एक सफेद रंग की ब्रेजा कार वहां आकर रुकी। कार से चार से पांच लोग बाहर निकले और दोनों युवकों से पूछताछ करने लगे।

पीड़ितों का आरोप है कि कुछ ही देर बाद उन लोगों ने बिना कोई कारण बताए दोनों को जबरन कार में बैठा लिया। विरोध करने पर उनके साथ लाठी-डंडों से मारपीट की गई और उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

छह घंटे तक रखा अज्ञात स्थान पर

दोनों युवकों का कहना है कि उन्हें लगभग छह घंटे तक एक गुप्त स्थान पर रखा गया, जहां लगातार उनसे पूछताछ की गई। इस दौरान उनके साथ पुलिस कर्मियों द्वारा थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि बेल्ट और डंडों से उनकी पिटाई की गई, जिससे शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पड़ गए। पीड़ितों का कहना है कि शाम करीब छह बजे उन्हें शिवराजपुर थाने लाया गया। इस दौरान उनके परिजनों को उनकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी, जिससे परिवार में दहशत का माहौल बन गया।

परिजनों ने किया हंगामा

जब युवकों के परिजनों को उनके उठाए जाने की जानकारी मिली तो उन्होंने उनकी तलाश शुरू कर दी। आरोप है कि पुलिस सादी वर्दी में एक निजी वाहन से युवकों को कहीं और ले जाने का प्रयास कर रही थी। इस दौरान परिजनों ने वाहन का पीछा किया और हाईवे पर गाड़ी रुकवाकर विरोध जताया।

परिजनों का कहना है कि काफी देर तक हंगामा करने के बाद ही पुलिस दोनों युवकों को शिवराजपुर थाने लेकर पहुंची। देर शाम तक थाने में परिजनों को युवकों से मिलने भी नहीं दिया गया। विरोध बढ़ने के बाद आखिरकार दोनों से मुलाकात कराई गई।

छह दरोगाओं पर गंभीर आरोप

पीड़ित विनय पाल और सत्यम ने डीसीपी पश्चिम को दी गई शिकायत में शिवराजपुर थाने में तैनात छह पुलिस अधिकारियों के नाम भी दर्ज कराए हैं। शिकायत के अनुसार हिमांशु सिंह, अभिषेक सिंह, विक्रांत यादव, लोकेश सोलंकी, अटल और सुरेश नामक दरोगाओं पर थर्ड डिग्री देकर मारपीट करने का आरोप लगाया गया है।

पीड़ितों का कहना है कि पूछताछ के नाम पर उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके शरीर पर बेल्ट और डंडों से मारपीट के स्पष्ट निशान मौजूद हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

घटना के बाद पीड़ित विनय पाल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया है। वीडियो में उसने पुलिस कर्मियों पर थर्ड डिग्री देने और बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगाया है। वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

थाना प्रभारी ने क्या कहा?

शिवराजपुर थाना प्रभारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि विनय पाल और सत्यम को पूर्व में हुई कुछ घटनाओं के संबंध में पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। उनके अनुसार पूछताछ की प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई की गई थी। हालांकि उन्होंने मारपीट और थर्ड डिग्री के आरोपों पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की।

डीसीपी पश्चिम ने दिए जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी पश्चिम एस. एम. कासिम आबिदी ने दोनों युवकों की शिकायत पर जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

डीसीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति के साथ कानून के दायरे से बाहर जाकर व्यवहार करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जांच रिपोर्ट पर टिकी सभी की नजर

फिलहाल यह मामला आरोप और पुलिस के पक्ष के बीच उलझा हुआ है। एक ओर पीड़ित युवक पुलिस पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं पुलिस का कहना है कि उन्हें केवल पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। अब पूरे मामले में डीसीपी पश्चिम द्वारा कराई जा रही जांच की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में पुलिस कर्मियों ने अधिकारों का दुरुपयोग किया।

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