फरहान नबी का विदेशी फंडिंग कनेक्शन: अमरोहा में 11 करोड़ की जमीन खरीदी, घर में ठहराए विदेशी नागरिक

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जर्मनी, तुर्की और बांग्लादेश से मिली करोड़ों की हवाला फंडिंग

उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) द्वारा गिरफ्तार फरहान नबी सिद्दीकी के खिलाफ जांच में अब नए और गंभीर खुलासे हुए हैं। एटीएस सूत्रों के अनुसार, फरहान नबी ने विदेश से हवाला नेटवर्क के जरिए आई फंडिंग से अमरोहा जिले में 11 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी थी। इसके अलावा, उसने इस रकम का एक हिस्सा अपनी निजी कंपनी में निवेश किया। फरहान पर विदेशी नागरिकों को बिना अनुमति अपने घर में ठहराने का भी आरोप है।

हवाला चैनल के जरिए आई विदेशी फंडिंग

एटीएस की जांच में यह सामने आया है कि फरहान नबी लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था। उसे धार्मिक पुस्तकों की छपाई और प्रकाशन के नाम पर विदेशों से धनराशि मिलती थी। यह पैसा जर्मनी, तुर्की और बांग्लादेश जैसे देशों से हवाला माध्यमों से भारत भेजा जा रहा था। प्रारंभिक जांच में यह भी खुलासा हुआ कि फरहान ने इस रकम का उपयोग न केवल संपत्ति खरीदने में किया, बल्कि अपनी कंपनियों के संचालन में भी लगाया।

अमरोहा में 11 करोड़ की संपत्ति खरीदी

फरहान नबी ने हवाला से प्राप्त फंडिंग के जरिए अमरोहा जिले में करीब 11 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी। एटीएस को शक है कि इस संपत्ति का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया जा सकता था। फिलहाल एजेंसी ने उस संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और फंडिंग की पूरी ट्रेल खंगाली जा रही है।

घर में ठहराए विदेशी नागरिक

जांच में यह भी पाया गया कि फरहान ने अपने ग्रेटर नोएडा स्थित घर में कई विदेशी नागरिकों को ठहराया था। इनमें जर्मनी, तुर्की और बांग्लादेश के नागरिक शामिल हैं। एटीएस अधिकारियों के मुताबिक, इन लोगों की न तो स्थानीय प्रशासन को सूचना दी गई थी और न ही कोई कानूनी अनुमति ली गई थी। एजेंसी को आशंका है कि इन विदेशी नागरिकों के माध्यम से भारत में सांप्रदायिक तनाव और धार्मिक नफरत फैलाने की साजिश रची जा रही थी।

नेटवर्क के विस्तार की जांच जारी

एटीएस फरहान नबी से लगातार पूछताछ कर रही है और उसके विदेशी संपर्कों की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फंडिंग का वास्तविक स्रोत कौन था और इसका उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया गया।

“फरहान नबी का मामला केवल अवैध फंडिंग का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। इसकी जांच कई एजेंसियां मिलकर कर रही हैं।” — एटीएस अधिकारी

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर हवाला और विदेशी फंडिंग नेटवर्क की गहराई को उजागर कर दिया है, जो धार्मिक गतिविधियों की आड़ में देश की शांति और सौहार्द्र को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

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