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फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर सौ से ज्यादा लोगों से करोड़ों की ठगी  

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कोरियर फ्रेंचाइजी दिलाने और मोटे मुनाफे का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठने का मामला सामने आया है। सेक्टर दो स्थित एक निजी कंपनी के प्रबंधन पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। पीड़ितों का दावा है कि कंपनी ने ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों के कोरियर प्वाइंट की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर 100 से अधिक लोगों को ठगा है। मंगलवार को सात पीड़ित एसीपी-2 और डीसीपी कार्यालय पहुंचे और कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत सौंपी।

पीड़ितों के अनुसार सेक्टर-2 में संचालित कंपनी सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से विज्ञापन जारी कर लोगों को निवेश के लिए आकर्षित करती थी। विज्ञापन में दावा किया जाता था कि कंपनी विभिन्न ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म के कोरियर प्वाइंट की फ्रेंचाइजी उपलब्ध कराती है। इसके तहत पिन कोड के आधार पर क्षेत्र आवंटित किया जाता और प्रतिदिन निश्चित संख्या में पार्सल देकर आकर्षक कमीशन का भरोसा दिया जाता था। ग्रेटर नोएडा वेस्ट निवासी सुनीता देवी और उनके पति बाबूराम ने बताया कि करीब छह महीने पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर कंपनी का विज्ञापन देखा था।

विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के बाद कंपनी के प्रतिनिधियों ने उन्हें फ्रेंचाइजी लेने के लिए प्रेरित किया। चार जनवरी को उन्होंने एडवांस के तौर पर 15 हजार रुपये जमा किए। इसके कुछ दिन बाद कंपनी के कहने पर 2.35 लाख रुपये और ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। पीड़ित दंपति का आरोप है कि उन्हें ग्रेटर नोएडा वेस्ट क्षेत्र का पिन कोड आवंटित करते हुए कोरियर फ्रेंचाइजी दिए जाने का दावा किया गया। कंपनी ने भरोसा दिलाया था कि उन्हें प्रतिदिन करीब 200 पार्सल मिलेंगे और प्रत्येक पार्सल पर 10 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाएगा। बेहतर आमदनी की उम्मीद में सुनीता देवी ने करीब 50 हजार रुपये मासिक किराये पर दुकान लेकर काम शुरू कर दिया। हालांकि, चार महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें एक भी कोरियर पार्सल नहीं मिला। इस दौरान कई बार कंपनी प्रबंधन से संपर्क किया गया, लेकिन हर बार जल्द काम शुरू होने का आश्वासन देकर उन्हें टाल दिया गया। मंगलवार को जब वह कंपनी के कार्यालय पहुंचीं तो वहां ताला लटका मिला। मौके पर उनके जैसे कई अन्य लोग भी मौजूद थे, जो खुद को इसी तरह की ठगी का शिकार बता रहे थे।

कई अन्य ने भी लगाए आरोप

पीड़ितों में लता शर्मा, ईशान, आशीष, नीतीश, शहजाद और देवेंद्र दत्त समेत अन्य लोगों ने भी आरोप लगाया कि उनसे 50 हजार रुपये से लेकर 2.50 लाख रुपये तक लिए गए, लेकिन न तो कोई काम दिया गया और न ही निवेश की गई रकम वापस की गई। सभी पीड़ितों का कहना है कि कंपनी ने बड़े मुनाफे और तय कारोबार का लालच देकर उनसे पैसे वसूले और बाद में कार्यालय बंद कर फरार हो गई। पीड़ितों का दावा है कि अब तक 100 से अधिक लोग इस कंपनी के झांसे में आ चुके हैं और कुल ठगी की रकम करोड़ों में है। सभी ने पुलिस अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उनकी रकम वापस दिलाने की मांग की है।

कई पीड़ित गैर राज्यों के भी

मंगलवार को शिकायत देने पहुंचे पीड़ितों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन बिहार के पटना में भी इसी प्रकार का फर्जीवाड़ा कर रखा है। वहां भी आसपास के लोगों के साथ इसी प्रकार की ठगी हुई थी। उन्होंने आगे कहा कि अगर सुनवाई नहीं होती है तो पीड़ित पक्ष जल्द ही पुलिस कमिश्नर से मिलकर उनके सामने अपना पक्ष रखेगा। मुनाफा कमाने के चक्कर में पीड़ितों ने अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी थी। एक ओर जहां पीड़ितों से करीब ढाई लाख रुपये की ठगी की गई। वहीं दूसरी तरफ उन्हें हम महीने मोटा किराया देना पड़ा। फर्जीवाड़े के बाद से पीड़ितों के घर के लोग भी परेशान हैं। किसी ने बेटे की पढ़ाई तो किसी ने बेटी की शादी के लिए बचाई गई रकम को मुनाफे के चक्कर में आरोपियों को दिया था।

मामले की होगी जांच

इस संबंध में डीसीपी साद मियां खान ने बताया कि पीड़ितों की शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की जांच कराई जा रही है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साइबर और आर्थिक अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी फ्रेंचाइजी में निवेश करने से पहले कंपनी का पंजीकरण, कार्यालय की वैधता, पूर्व रिकॉर्ड और संबंधित ब्रांड से उसके अधिकृत संबंधों की जांच अवश्य करनी चाहिए। आकर्षक मुनाफे और कम समय में अधिक कमाई के दावों के झांसे में आकर बिना सत्यापन निवेश करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।

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