शाकाहारी और मांसाहारी थाली दोनों हुईं सस्ती, Crisil रिपोर्ट में खुलासा—सब्ज़ियों और दालों की कीमतों में तेज गिरावट
नई दिल्ली। देश में महंगाई दर (Inflation Rate) में लगातार गिरावट का असर अब आम लोगों की रसोई पर साफ दिखने लगा है। रेटिंग एजेंसी Crisil Intelligence की नई रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 में घर पर बनने वाली शाकाहारी (Vegetarian Thali) और मांसाहारी थाली (Non-Vegetarian Thali) की लागत में सालाना आधार पर 13% की गिरावट दर्ज की गई है। खाद्य महंगाई में कमी का मुख्य कारण सब्जियों की कीमतों में गिरावट (Vegetable Prices Down) और दालों के दाम में नरमी है।
टमाटर, प्याज, दालें — किस चीज़ की कितनी गिर गई कीमत?
रिपोर्ट में बताया गया है कि नवंबर में टमाटर की कीमत (Tomato Prices) उच्च आपूर्ति के कारण 17% कम हुईं।
वहीं, आलू की कीमतें (Potato Prices) 29% गिरीं, क्योंकि पिछले वर्ष के मुकाबले आधार कीमत अधिक थी।
सबसे बड़ी राहत प्याज की कीमत (Onion Price) में मिली है, जो 53% तक सस्ती हो गई हैं। Crisil के अनुसार, रबी स्टॉक में बढ़ोतरी और कमजोर निर्यात की वजह से प्याज़ की कीमतों पर दबाव बना रहा।
इसके अलावा, दालों की कीमतों (Pulses Prices) में भी 17% की गिरावट दर्ज की गई है।
दालें सस्ती होने के पीछे मुख्य कारण हैं—
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बढ़ा हुआ घरेलू भंडारण
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चना, पीले मटर और काले चने का भारी आयात
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बाजार में स्टॉक की बढ़ती उपलब्धता
थाली की लागत में बदलाव
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शाकाहारी थाली: सालाना आधार पर 13% सस्ती, लेकिन मासिक आधार पर 2% महंगी
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मांसाहारी थाली: सालाना आधार पर 13% सस्ती, मासिक आधार पर 1% सस्ती
आगे क्या होगा? विशेषज्ञों की भविष्यवाणी
Crisil के निदेशक पुषान शर्मा का कहना है कि:
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प्याज की कीमतों में आगे चलकर बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि खरीफ फसल की कटाई में देरी और उपज कम है।
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आलू की कीमतें और नीचे आ सकती हैं क्योंकि स्टॉक बाजार में जारी किया जा रहा है।
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दालों की कीमतें 30% आयात शुल्क और भारी आयात के कारण आने वाले महीनों में स्थिर रह सकती हैं।
महंगाई दर पर असर
भारत की रिटेल महंगाई दर (Retail Inflation) अक्टूबर में गिरकर 0.25% पर पहुंच गई, जो 2001 में शुरू हुई वर्तमान सीरीज का सबसे निचला स्तर है।
यह गिरावट खाद्य कीमतों (Food Prices) में लगातार नरमी का परिणाम है।