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नोएडा में मानकों की अनदेखी से चल रही थी कंपनी, कारखाना विभाग ने सील की कंपनी

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  • घटना में एक मजदूर की हुई थी मौत, 35 हुए थे घायल, मजदूरों के बयान पर हुई कार्रवाई

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नोएडा सेक्टर-4 स्थित बिजली मीटर बनाने वाली कंपनी में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री में निर्माण और उत्पादन गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। साथ ही कंपनी सील कर दी गई है। जांच में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई है। हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि 35 मजदूर घायल हो गए थे। इनमें से 33 मजदूरों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि दो मजदूरों का इलाज अभी भी जारी है। घटना के बाद श्रम विभाग और कारखाना निदेशालय की संयुक्त टीम ने बुधवार को निरिक्षण किया और मजदूरों के बयान पर कार्रवाई की गई। कंपनी में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की बात सामने आई है।

नोएडा सहायक निदेशक कारखाना रामबहादुर ने बताया कि यह घटना 12 मार्च की सुबह करीब 5 बजे सेक्टर-4 स्थित कंपनी में आग लगी थी। रात की पाली में काम कर रहे लगभग 200 कर्मचारियों ने सबसे पहले स्टोर क्षेत्र के पास धुआं और आग की लपटें देखीं। कर्मचारियों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग तेजी से फैल गई। इसके बाद पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 और दमकल विभाग को सूचना दी गई। करीब 20-25 मिनट के भीतर दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया, वहीं चार दिन में आग बुझाई गई थी। जांच में सामने आया कि फैक्ट्री भवन में दो बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर, प्रथम और द्वितीय तल बने हुए हैं।

इसके अलावा छत पर टीन शेड डालकर अतिरिक्त स्टोर बनाया गया था। जबकि अग्निशमन विभाग को गलत जानकारी देकर एनओसी ली गई थी। परिसर के चारों ओर जरूरी सेटबैक क्षेत्र भी नहीं छोड़ा गया था, जिससे आपात स्थिति में दमकल और बचाव दल की पहुंच प्रभावित हुई। अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कई स्थानों पर निकास मार्ग ब्लॉक थे और स्मोक डिटेक्टर काम नहीं कर रहे थे। फैक्ट्री मैनेजमेंट विद्युत सुरक्षा से संबंधित नियमित परीक्षण की रिपोर्ट भी प्रस्तुत नहीं कर सका। अधिकारियों ने बताया कि परिसर में करीब 50 टन पॉलीकार्बोनेट और लगभग 200 लीटर ज्वलनशील रसायन का स्टोर किया जा रहा था, जिन्हें सुरक्षित तरीके से नहीं रखा गया था। जांच के अनुसार आग लगने की मुख्य वजह विद्युत शॉर्ट सर्किट, जर्जर वायरिंग, अनुमोदित सीमा से अधिक विद्युत भार और अग्नि सुरक्षा उपकरणों की खराब स्थिति रही। साथ ही नियमित फायर फाइटिंग ड्रिल और सुरक्षा ऑडिट का अभाव भी सामने आया है।


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