मेट्रो लाइन-3 के पास निर्माण पर सख्ती: अब 50 मीटर के दायरे में मंजूरी ज़रूरी

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मुंबई मेट्रो लाइन-3 (एक्वा लाइन) के भूमिगत टनल को सुरक्षित रखने के लिए मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MMRC) ने एक बड़ा कदम उठाया है। MMRC ने सार्वजनिक नोटिस जारी करते हुए कहा है कि मेट्रो लाइन के दोनों ओर 50 मीटर के दायरे में आने वाली किसी भी इमारत में पुनर्विकास, निर्माण, ध्वस्तीकरण या खुदाई जैसे काम अब बिना मंजूरी नहीं किए जा सकेंगे। इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चल रहे निर्माण कार्य से भूमिगत टनल पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।

MMRC ने स्पष्ट किया है कि 33 किलोमीटर लंबी भूमिगत मेट्रो लाइन-3, जो कफ परेड से आरे कॉलोनी तक जाती है, बेहद संवेदनशील इंजीनियरिंग ज़ोन में आती है। ऐसे में आसपास होने वाली भारी मशीनरी, गहरी खुदाई या इमारतों में बड़े स्ट्रक्चरल बदलाव टनल की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। इसी जोखिम को देखते हुए सभी घर–मालिकों, हाउसिंग सोसायटियों और बिल्डरों को किसी भी प्रकार का कार्य शुरू करने से पहले MMRC से तकनीकी मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। यह मंजूरी यह सुनिश्चित करेगी कि निर्माण कार्य मेट्रो टनल की सुरक्षा मानकों के अनुरूप है।

MMRC अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में शहर में तेजी से पुनर्विकास परियोजनाएँ बढ़ी हैं, जिन्हें देखते हुए इस तरह की सुरक्षा गाइडलाइन बेहद जरूरी है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि जो भी सोसायटी या बिल्डर इस नियम का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, MMRC की टीम ज़ोन में नियमित निरीक्षण भी करेगी, ताकि किसी भी संभावित खतरे की पहचान समय रहते की जा सके। इस नए नियम से प्रभावित क्षेत्रों में कई हाउसिंग सोसायटियों और डेवलपर्स ने जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शहर की एक महत्वपूर्ण मेट्रो लाइन की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, क्योंकि लाइन-3 मुंबई के सबसे व्यस्त इलाकों से होकर गुजरती है। हालांकि, कुछ डेवलपर्स का कहना है कि मंजूरी की प्रक्रिया को तेज और सरल बनाना भी उतना ही ज़रूरी होगा, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी न हो।

navya seth
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