India-EU ट्रेड डील पर अमेरिका नाराज़: रूसी तेल और यूक्रेन के बहाने यूरोप पर ‘विश्वासघात’ का आरोप

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अमेरिका की खुली नाराज़गी


भारत और यूरोपीय यूनियन (India-EU FTA) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को लेकर अमेरिका असहज नजर आ रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस डील पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए यूरोप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत से व्यापार बढ़ाकर यूरोप अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध को वित्त पोषित कर रहा है।

रूसी तेल बना विवाद की जड़


स्कॉट बेसेंट के मुताबिक भारत रूस से कच्चा तेल खरीदता है और उसे परिष्कृत कर उत्पाद तैयार करता है। इन परिष्कृत उत्पादों को यूरोपीय देश बड़े पैमाने पर खरीद रहे हैं। ऐसे में यूरोप, रूस के खिलाफ प्रतिबंधों की बात तो करता है, लेकिन व्यवहार में उससे जुड़े व्यापार को ही बढ़ावा दे रहा है।

‘यूक्रेन से ऊपर व्यापार’ का आरोप


CNBC को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा कि यूरोपीय देशों का यह रवैया निराशाजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोप ने यूक्रेन के लोगों से ज्यादा अपने व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दी है। बेसेंट ने यहां तक कहा कि जब भी कोई यूरोपीय नेता यूक्रेन की बात करे, तो यह जरूर याद रखना चाहिए कि व्यापार उनके लिए पहले आता है।

India-EU FTA की बड़ी बातें


भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए इस समझौते में लगभग 90 प्रतिशत वस्तुओं पर टैरिफ को बेहद कम या शून्य करने पर सहमति बनी है। इससे यूरोपीय निर्यातकों को हर साल करीब 4 अरब यूरो की बचत होगी। यह समझौता भारत द्वारा किसी भी साझेदार को दिया गया अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक अवसर माना जा रहा है।

पीएम मोदी का बयान


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील को केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि “साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट” बताया है। उनका कहना है कि इससे भारत और यूरोप के बीच आर्थिक सहयोग, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

वैश्विक राजनीति में नया तनाव


विशेषज्ञों का मानना है कि India-EU ट्रेड डील से वैश्विक व्यापार संतुलन में बदलाव आ सकता है। अमेरिका की प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि आने वाले समय में इस समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति में तनाव और बढ़ सकता है।

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