बजट 2026 से एनर्जी सेक्टर को मिल सकता है बड़ा बूस्ट, पावर और न्यूक्लियर शेयरों पर रहेगी नजर

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नई दिल्ली।


केंद्रीय बजट 2026 से पहले ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े शेयर निवेशकों के रडार पर आ गए हैं। बाजार को उम्मीद है कि इस बार सरकार नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली वितरण सुधार और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर दे सकती है। ऐसे में पावर सेक्टर के कई प्रमुख शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है।

रिन्यूएबल एनर्जी शेयरों में तेजी की उम्मीद

विश्लेषकों के अनुसार, यदि बजट में सोलर, विंड और रूफटॉप प्रोजेक्ट्स को लेकर प्रोत्साहन की घोषणा होती है, तो टाटा पावर, सुजलॉन एनर्जी, JSW एनर्जी और टोरेंट पावर जैसे शेयरों को सीधा फायदा मिल सकता है। सरकार के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को देखते हुए रिन्यूएबल सेक्टर को मजबूत समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है।

डिस्ट्रिब्यूशन और ट्रांसमिशन कंपनियां भी फोकस में

बिजली वितरण नेटवर्क के आधुनिकीकरण से जुड़ी योजनाएं टाटा पावर, टोरेंट पावर और CESC जैसी कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती हैं। वहीं, यदि ट्रांसमिशन कॉरिडोर में कैपेक्स बढ़ाया गया, तो पावर ग्रिड कॉरपोरेशन जैसे स्टॉक्स में मजबूती आ सकती है।

ऊर्जा सेक्टर को फाइनेंस देने वाली कंपनियां जैसे REC, PFC और IREDA भी चर्चा में रहेंगी, खासकर तब जब बजट में नई वित्तीय सहायता योजनाओं की घोषणा होती है।

वायर और केबल कंपनियों को भी मिल सकता है फायदा

भारतनेट और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गति बनी रहने से हैवेल्स, KEI इंडस्ट्रीज और पॉलीकैब जैसी वायर और केबल कंपनियों को भी मजबूती मिल सकती है।

न्यूक्लियर सेक्टर में निजी एंट्री से बदलेगा खेल

ऊर्जा क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव न्यूक्लियर एनर्जी में निजी क्षेत्र की एंट्री को माना जा रहा है। SHANTI Act 2025 लागू होने के बाद पहली बार निजी और विदेशी कंपनियां परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में साझेदारी कर सकेंगी। बजट में इससे जुड़ी किसी भी घोषणा से NTPC और NTPC ग्रीन जैसे शेयरों में तेज उछाल आ सकता है।

निर्मला सीतारमण पेश करेंगी रिकॉर्ड नौवां बजट

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को लगातार नौवां बजट पेश करेंगी, जो एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड होगा। यह बजट सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं, स्वच्छ ऊर्जा नीति और ‘विकसित भारत’ विजन की दिशा को स्पष्ट करेगा।

निवेशकों की नजर बजट संकेतों पर

बजट 2026 से यह साफ होगा कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और क्लीन एनर्जी को कितना समर्थन देती है। इन्हीं संकेतों के आधार पर आने वाले समय में एनर्जी सेक्टर के शेयरों की दिशा तय हो सकती है।

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