ईरान का बड़ा दावा: युद्ध के दबाव में अमेरिका को भारत से करनी पड़ी गुहार
Mediawali news
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दो सप्ताह से अधिक समय गुजरने के बाद भी इस संघर्ष का कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump पर तीखा हमला करते हुए भारत का नाम लेकर तंज कसा है।
ईरान का कहना है कि युद्ध के दबाव के कारण अमेरिका को अपनी विदेश नीति में बदलाव करना पड़ा है और उसे भारत समेत कई देशों से सहयोग मांगने की स्थिति में आना पड़ा है।
दो हफ्ते बाद भी नहीं निकला युद्ध का समाधान
ईरान पर अमेरिका और Israel के हमलों को करीब दो सप्ताह हो चुके हैं। हालांकि अब तक कोई निर्णायक परिणाम सामने नहीं आया है।
ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी रणनीति के तहत खासतौर पर Strait of Hormuz को लेकर दबाव बनाया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।
दुनिया के लगभग 25% कच्चे तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है।
इस मार्ग में तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर पड़ा है।
भारत के मुद्दे पर अमेरिका पर ईरान का तंज
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने एक रिपोर्ट साझा करते हुए दावा किया कि अमेरिकी नीति में आए बदलाव से रूस को आर्थिक लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हाल ही में भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट दी है। ईरान का आरोप है कि युद्ध और वैश्विक दबाव के कारण अमेरिका को यह कदम उठाना पड़ा।
रूस को मिल रहा आर्थिक फायदा
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का लाभ Vladimir Putin की सरकार को मिल रहा है।
मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
रूसी तेल की मांग बढ़ने से रोजाना लगभग 15 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त मुनाफा।
खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता से रूस के ऊर्जा निर्यात को फायदा।
भारत और चीन जैसे देशों में रूसी तेल की बिक्री बढ़ना।
तेल टैंकरों पर हमलों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल।
होर्मुज स्ट्रेट का वैश्विक महत्व
Strait of Hormuz विश्व के ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद अहम मार्ग है।
युद्ध से पहले भारत के लगभग 45% तेल और गैस आयात इसी मार्ग से आते थे।
तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजार में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
वैश्विक दबाव में अमेरिका
विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध लंबा खिंचने से तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है।
ऐसे हालात में अमेरिका द्वारा भारत समेत कुछ देशों को रूस से तेल खरीदने की अस्थायी छूट देना वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।