नोएडा में मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी दिलाने के बहाने ठगी करने वाले तीन जालसाज गिरफ्तार
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दिल्ली एनसीआर की मल्टीनेशनल कंपनी में बेरोजगार युवाओं को अच्छी सैलरी वाली नौकरी का ख्वाब दिखाकर ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह का नोएडा थाना बिसरख पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो नामी मल्टीनेशनल कंपनियों (MNC) में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से हजारों-लाखों रुपये ऐंठ रहे थे। आरोपियों के पास से कंप्यूटर सेट, फर्जी जॉब ऑफर लेटर, मोबाइल फोन और नकदी भी बरामद हुई है।
डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि 12 मार्च को एक पीड़ित ने थाना बिसरख में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोग उसे अच्छी कंपनी में मोटे पैकेज पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर पैसे मांग रहे हैं। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि यह गिरोह इटेड़ा गोल चक्कर के पास सक्रिय है। इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर तीनों आरोपियोंविकास डाबर, अरुण कुमार और वैभव कुमार—को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि तीनों आरोपी पहले खुद निजी कंपनियों में काम कर चुके हैं और उन्हें भर्ती प्रक्रिया की पूरी जानकारी थी। इसी का फायदा उठाकर ये लोग नौकरी तलाश कर रहे युवाओं का डेटा वेबसाइटों से हासिल करते थे। इसके बाद वे खुद को किसी बड़ी कंपनी का अधिकारी बताकर उम्मीदवारों से संपर्क करते थे।
आरोपी पहले युवाओं को भरोसे में लेते थे और बताते थे कि उन्हें 30 हजार से 60 हजार रुपये महीना तक की नौकरी दिला सकते हैं। फिर वार्षिक पैकेज का 15 से 20 प्रतिशत कमीशन तय करते थे। शुरुआत में टोकन मनी के नाम पर 40 हजार से 60 हजार रुपये तक अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे। इसके बाद कंप्यूटर से फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर कंपनी के लोगो और लेटरहेड के साथ नकली जॉब ऑफर लेटर तैयार करते थे और उम्मीदवार को भेज देते थे। ऑफर लेटर देखकर अभ्यर्थी को यकीन हो जाता था और वह बाकी रकम भी ट्रांसफर कर देता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक CPU, एक मॉनिटर, एक की-बोर्ड, एक माउस, छह फर्जी जॉब ऑफर लेटर, तीन मोबाइल फोन और 7600 रुपये नकद बरामद किए हैं।
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जॉइनिंग के नाम पर करते थे गुमराह
जब उम्मीदवार असली कंपनी में जाकर नौकरी के बारे में जानकारी करता था तो वहां से कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता था। इस पर आरोपी तकनीकी कारण या दस्तावेजों की कमी का बहाना बनाकर नई जॉइनिंग डेट दे देते थे या किसी दूसरी कंपनी का नया ऑफर लेटर भेजकर फिर से गुमराह करते थे।
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डिजिटल पेमेंट से लेते थे पैसा
गिरोह के सदस्य मोबाइल फोन के जरिए उम्मीदवारों से लगातार संपर्क में रहते थे और फोनपे, पेटीएम और गूगल पे जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से पैसे लेते थे। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और अन्य लेन-देन की भी जांच कर रही है, जिससे ठगी की कुल रकम और पीड़ितों की संख्या का पता लगाया जा सके।
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पुलिस की अपील: नौकरी के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति को पैसे न दें। ऑफर लेटर मिलने पर संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या दफ्तर में जाकर पूरी जानकारी जरूर करें।