दिल्ली शराब नीति केस: केजरीवाल समेत 23 आरोपी बरी, भाजपा बोली— ‘कानूनी प्रक्रिया अभी बाकी’
राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत
दिल्ली के चर्चित शराब नीति मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित 23 आरोपियों को राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने सभी को बरी कर दिया। फैसले के बाद आप नेताओं और कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। पार्टी ने इसे “सच की जीत” बताया और केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
भाजपा का तीखा पलटवार
फैसले के तुरंत बाद भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। भाजपा सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मामला पूरी तरह खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि यह तकनीकी आधार पर लिया गया निर्णय है और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार कर सकती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि आरोप पूरी तरह निराधार थे, तो वे लगे कैसे?
अमित मालवीय ने उठाए गंभीर सवाल
भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निचली अदालत का फैसला है और उच्च न्यायालयों में इसकी परीक्षा बाकी है। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। मालवीय ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सब कुछ पारदर्शी था, तो दिल्ली सरकार ने नीति को वापस क्यों लिया और उसमें संशोधन क्यों किए? कमीशन दर 6% से बढ़ाकर 12% क्यों की गई और विक्रेताओं की संख्या में भारी कमी क्यों आई? उन्होंने फोन और सिम कार्ड नष्ट किए जाने के आरोपों का भी जिक्र किया।
‘मास्टरमाइंड’ का आरोप
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि जनता जानती है कि कथित एक्साइज घोटाले के मास्टरमाइंड कौन थे। उन्होंने दावा किया कि आगे की न्यायिक प्रक्रिया में सच्चाई सामने आएगी और संबंधित लोगों की गवाही महत्वपूर्ण होगी।
राजद ने भाजपा पर साधा निशाना
वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध के तहत मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष को दबाने की कोशिश की जाती है। राजद सांसद मनोज कुमार झा ने भी कहा कि जब मुकदमे प्रतिशोध की भावना से प्रेरित होते हैं तो उनका परिणाम ऐसा ही होता है।
राजनीतिक और कानूनी लड़ाई जारी
दिल्ली शराब नीति मामला अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। जहां एक ओर आप इसे अपनी नैतिक जीत बता रही है, वहीं भाजपा उच्च न्यायालयों में आगे की कानूनी संभावनाओं की बात कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मामला न्यायिक और राजनीतिक स्तर पर किस दिशा में आगे बढ़ता है