Noida में 10,508 पुरानी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन रद्द, सड़कों पर दिखीं तो होंगी जब्त
Mediawali news, Noida
देश की राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में पुरानी गाड़ियों पर सख्ती तेज हो गई है। परिवहन विभाग ने अप्रैल 2025 से दिसंबर 2025 के बीच 10,508 वाहनों का पंजीकरण प्रमाण पत्र रद्द कर दिया है। अब ये वाहन नोएडा और ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर नहीं चल सकेंगे। अगर ऐसे वाहन चलते मिले तो उन्हें जब्त कर लिया जाएगा।
किन गाड़ियों पर हुई कार्रवाई?
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक
- 10 साल पुराने 1,542 डीजल वाहन
- 15 साल से अधिक पुराने 8,966 पेट्रोल वाहन
इन सभी का रजिस्ट्रेशन तय समय सीमा पूरी होने के बाद पहले सस्पेंड किया गया और फिर निरस्त कर दिया गया।
पहले नोटिस, फिर रद्द होता है रजिस्ट्रेशन
एआरटीओ नंदकुमार के अनुसार, कार्रवाई से पहले वाहन मालिकों को नोटिस भेजा जाता है। समय सीमा पूरी होने पर रजिस्ट्रेशन निलंबित किया जाता है और बाद में स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाता है।
हालांकि वाहन मालिक चाहें तो दिल्ली-एनसीआर से बाहर किसी अन्य जिले से एनओसी लेकर गाड़ी ट्रांसफर कर सकते हैं।
स्क्रैप में बेच दी गाड़ी? तुरंत कराएं रजिस्ट्रेशन निरस्त
परिवहन विभाग ने वाहन स्वामियों को सलाह दी है कि यदि गाड़ी स्क्रैप में बेच दी है तो तुरंत रजिस्ट्रेशन निरस्त कराएं।
अगर ऐसा नहीं किया गया तो-
- रोड टैक्स लगातार बनता रहेगा
- जुर्माना भी देना पड़ सकता है
- खासकर व्यावसायिक वाहन मालिकों को अधिक आर्थिक नुकसान होगा
नोटिस मिलने के बाद सूचना देने पर भी पहले का बकाया टैक्स भरना अनिवार्य होगा।
जिले में 12 लाख से ज्यादा वाहन
परिवहन विभाग के अनुसार जिले में कुल वाहनों की संख्या 12,20,846 पहुंच चुकी है।
- 7,10,243 दोपहिया वाहन
- 3,73,695 निजी चार पहिया वाहन
सबसे ज्यादा संख्या दोपहिया वाहनों की है।
दो अधिकृत स्क्रैप सेंटर, और खुलेंगे
जिले में फिलहाल दो सरकारी मान्यता प्राप्त वाहन स्क्रैप केंद्र संचालित हैं—
- सेक्टर-80, नोएडा में Maruti Suzuki Toyotsu India Pvt Ltd
- इकोटेक-1, ग्रेटर नोएडा में Mahindra MSTC Recycling Pvt Ltd
इन केंद्रों से वाहन कटवाने पर आधिकारिक स्क्रैप प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में जिले में और अधिक स्क्रैप सेंटर खोले जा सकते हैं।
क्या है संदेश…
परिवहन विभाग की इस कार्रवाई को प्रदूषण नियंत्रण और सड़क सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। साफ संदेश है, समय सीमा पूरी कर चुकी गाड़ियों को सड़कों से हटाना ही होगा, वरना कार्रवाई तय है।