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टैटू ट्रेंड और रक्तदान पर असर
आज के समय में टैटू युवाओं के बीच फैशन और स्टाइल का बड़ा प्रतीक बन चुका है। कॉलेज स्टूडेंट्स से लेकर नौकरीपेशा युवाओं तक, टैटू बनवाने का चलन तेजी से बढ़ा है। लेकिन यही फैशन कई बार उन्हें रक्तदान जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी से दूर कर देता है। स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार टैटू बनवाने के बाद एक निश्चित अवधि तक व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सकता। जिला अस्पताल की डॉक्टर श्वेता के अनुसार, टैटू बनवाने के बाद कम से कम एक वर्ष तक रक्तदान नहीं किया जा सकता। पहले यह अवधि छह महीने थी, लेकिन संक्रमण के खतरे को देखते हुए इसे बढ़ाकर एक साल कर दिया गया है। हालांकि रेड क्रॉस से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि छह माह बाद भी रक्तदान किया जा सकता है, लेकिन सरकारी गाइडलाइन एक वर्ष की अवधि पर जोर देती है।
संक्रमण का बढ़ता खतरा और विंडो पीरियड
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टैटू बनवाने में सबसे बड़ा खतरा संक्रमण का होता है। कई जगहों पर सस्ते और असुरक्षित तरीके से टैटू बनाए जाते हैं, जहां एक ही सुई कई लोगों पर इस्तेमाल की जाती है। इससे हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और एचआईवी जैसे गंभीर वायरस फैलने का खतरा रहता है। डॉक्टर श्वेता के अनुसार, टैटू के बाद लगभग 90 दिनों की अवधि को “विंडो पीरियड” कहा जाता है, जिसमें यदि संक्रमित सुई का प्रयोग हुआ हो तो बीमारी के लक्षण सामने आ सकते हैं। कुछ संक्रमणों की पुष्टि में अधिक समय लग सकता है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से एक वर्ष तक रक्तदान न करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा टैटू इंक में मौजूद रसायनों से त्वचा एलर्जी, सूजन और अन्य साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं।
रक्तदान शिविरों में युवाओं की कमी
समाजसेवी पवन अग्रवाल, जो जय हिंदी सेवादार समिति के माध्यम से वर्षों से रक्तदान शिविर आयोजित कर रहे हैं, बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में टैटू के कारण रक्तदान से वंचित युवाओं की संख्या बढ़ी है। कई बार शिविरों में इच्छुक युवा आते हैं, लेकिन हाल ही में टैटू बनवाने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ता है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि उनके परिवार में एक बच्चे को रक्त की जरूरत थी, लेकिन उनके भतीजे का ब्लड ग्रुप मैच होने के बावजूद हालिया टैटू के कारण डॉक्टरों ने रक्त लेने से मना कर दिया।
अन्य कारण भी बनते हैं बाधा
विशेषज्ञों के अनुसार टैटू के अलावा भी कई कारण हैं, जिनसे युवा रक्तदान नहीं कर पाते। इनमें कम हीमोग्लोबिन, हाल की सर्जरी या गंभीर बीमारी, बुखार या संक्रमण, असंतुलित जीवनशैली, नशे की आदतें और रक्तदान को लेकर डर या भ्रांतियां शामिल हैं।
जागरूकता और सुरक्षित टैटू की जरूरत
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि युवाओं को टैटू बनवाने से पहले इसके नियम और प्रभाव समझने चाहिए। यदि टैटू बनवाना जरूरी है तो केवल सुरक्षित और प्रमाणित केंद्रों पर डिस्पोजेबल सुई का ही उपयोग कराना चाहिए। साथ ही टैटू बनवाने के बाद निर्धारित अवधि पूरी होने पर ही रक्तदान करें।
डॉ. अजय राणा, सीएमएस जिला अस्पताल का कहना है कि रक्तदान जीवनदान है और युवाओं को इस दिशा में जागरूक करने की जरूरत है, ताकि फैशन और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बना रहे और जरूरतमंदों को समय पर रक्त मिल सके।