भारत की बढ़ेगी हवाई ताकत: राफेल-तेजस के साथ ग्रिपेन भी हो सकता है शामिल, चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता

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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना की ताकत को और मजबूत करने के लिए स्वीडन की रक्षा कंपनी एसएएबी (SAAB) ने अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमान ग्रिपेन ई का बड़ा प्रस्ताव दिया है। सिंगापुर एयरशो (3 से 8 फरवरी) के दौरान कंपनी ने भारत को न केवल विमान देने बल्कि देश में उन्नत एयरोस्पेस इकोसिस्टम विकसित करने का भी वादा किया है।

सिंगापुर एयरशो में भारत को मिला बड़ा प्रस्ताव

सिंगापुर एयरशो के दौरान एसएएबी ने भारतीय वायुसेना के लिए ग्रिपेन ई फाइटर जेट को लेकर महत्वाकांक्षी ऑफर पेश किया। कंपनी का दावा है कि यह विमान राफेल और तेजस के साथ मिलकर भारत की वायु शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

तकनीकी पावरहाउस और त्वरित डिलीवरी का दावा

एसएएबी के मार्केटिंग ऑफिसर और वाइस प्रेसिडेंट मिकेल फ्रांजेन ने कहा कि ग्रिपेन ई दुनिया के सबसे आधुनिक और किफायती फाइटर सिस्टम में से एक है।
कंपनी का दावा है कि अनुबंध के तीसरे साल से ही विमानों की डिलीवरी शुरू हो सकती है। शुरुआत में स्वीडन से और बाद में भारत में उत्पादन तेज किया जाएगा।

राफेल और तेजस के साथ बढ़ेगी मारक क्षमता

फ्रांजेन के अनुसार, ग्रिपेन ई की उपलब्धता और ऑपरेशन क्षमता अन्य लड़ाकू विमानों से बेहतर है। यह राफेल और तेजस के साथ मिलकर भारतीय वायुसेना को दुश्मनों के खिलाफ बेजोड़ ताकत देगा।

इतिहास का सबसे बड़ा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्रस्ताव

एसएएबी ने भारत को रक्षा विमानन इतिहास का सबसे बड़ा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर देने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत भारतीय वायुसेना बिना विदेशी निर्माता की मदद के अपने सॉफ्टवेयर विकसित और प्रमाणित कर सकेगी।
ग्रिपेन में तेजी से विकसित हो रही AI तकनीक को भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी फाइटर प्रोजेक्ट AMCA के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

300 से अधिक भारतीय कंपनियों को मिलेगा अवसर

स्वीडिश कंपनी का लक्ष्य 300 से अधिक भारतीय कंपनियों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ना है। इससे भारत को एक क्षेत्रीय एयरोस्पेस इंडस्ट्रियल हब बनाने और भविष्य में रक्षा निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी।
यह प्रस्ताव केवल विमान निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि डिजाइन, उत्पादन और रखरखाव के व्यापक ढांचे पर आधारित है।

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