17 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया बुजुर्ग NRI कपल, ₹15 करोड़ की ठगी; TRAI-ED बनकर बोले ठग– खाते में है ब्लैक मनी

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दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहने वाले रिटायर्ड UN अधिकारियों से साइबर ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए की करोड़ों की ठगी, IFSO जांच में जुटी

नई दिल्ली।
राजधानी दिल्ली में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बुजुर्ग NRI दंपती को 17 दिनों तक तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर करीब 15 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। ठगों ने खुद को TRAI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताकर दंपती को डराया और उनके बैंक खातों में ब्लैक मनी होने का झांसा दिया।

पीड़ित दंपती की पहचान डॉ. ओम तनेजा और डॉ. इंदिरा तनेजा के रूप में हुई है। दोनों करीब 48 साल तक अमेरिका में रहे और संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े रहे। रिटायरमेंट के बाद वर्ष 2015 में भारत लौटकर वे दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-2 में रह रहे हैं।

ऐसे शुरू हुई ठगी

77 वर्षीय डॉ. इंदिरा तनेजा के मुताबिक, 24 दिसंबर 2025 को उन्हें एक कॉल आया। कॉलर ने दावा किया कि उनके मोबाइल नंबर से आपत्तिजनक कॉल की गई हैं और उनके बैंक खातों में काला धन जमा है। इसके बाद ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोप लगाए।

ठगों ने गिरफ्तारी वारंट और आपराधिक मामलों की धमकी देते हुए वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी शुरू कर दी। 10 जनवरी 2026 तक दंपती को वीडियो कॉल के जरिए मानसिक दबाव में रखा गया।

‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर

ठगों ने दंपती को मुंबई में पेश होने को कहा। पति की तबीयत और ऑपरेशन का हवाला देने पर ठगों ने उन्हें घर से बाहर न निकलने और किसी से बात न करने का आदेश दे दिया, जिसे वे “डिजिटल अरेस्ट” बता रहे थे।
डॉ. इंदिरा ने बताया कि अगर वह घर से बाहर जातीं या किसी को कॉल करने की कोशिश करतीं, तो ठग तुरंत उनके पति के फोन पर वीडियो कॉल शुरू कर देते थे।

8 खातों में ट्रांसफर कराए पैसे

इस दौरान ठगों ने डॉ. इंदिरा पर दबाव बनाकर 8 अलग-अलग बैंक खातों में कुल 14.85 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए। हर बार रकम अलग-अलग होती थी—कभी 2 करोड़ तो कभी 2.10 करोड़ रुपये से ज्यादा। बैंक जाने से पहले ठग उन्हें यह भी बताते थे कि बैंक स्टाफ के सवालों का क्या जवाब देना है।
ठगों का दावा था कि यह पैसा बाद में RBI के जरिए वापस मिल जाएगा।

पुलिस थाने पहुंचने पर खुला राज

10 जनवरी को ठगों ने दंपती को स्थानीय पुलिस थाने भेजा। वीडियो कॉल पर ही ठगों ने पुलिसकर्मियों से बात की और बदतमीजी भी की। थाने पहुंचने के बाद ही डॉ. इंदिरा को पूरी साजिश का अहसास हुआ।

IFSO कर रही जांच

दंपती ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच स्पेशल सेल की साइबर यूनिट IFSO को सौंप दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी लेनदेन और कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है।

कैसे बचें ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड से
  • कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या जांच नहीं करती

  • RBI, ED या पुलिस कभी पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती

  • धमकी या डर दिखाकर कॉल आए तो तुरंत 1930 पर शिकायत करें

  • किसी भी हाल में OTP, बैंक डिटेल या वीडियो कॉल निर्देश न मानें

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर ठग किस तरह डर और तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों की जीवन भर की कमाई लूट रहे हैं।

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