अमेरिका–वेनेजुएला तनाव से कच्चा तेल होगा महंगा? भारत पर क्या पड़ेगा असर
नई दिल्ली। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते सैन्य-राजनीतिक तनाव ने एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा साबित तेल भंडार है, ऐसे में वहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ना तय माना जाता है।
फिलहाल कीमतें क्यों काबू में हैं?
अभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब $60 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। इसकी बड़ी वजह यह है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते वेनेजुएला का तेल निर्यात पहले से ही सीमित है और मौजूदा हालात में भी उसकी रिफाइनिंग और उत्पादन व्यवस्था सामान्य बताई जा रही है। रॉयटर्स के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनी PDVSA के ऑपरेशंस पर अभी तक सीधे हमलों का बड़ा असर नहीं पड़ा है।
अमेरिका की कार्रवाई और असर
अमेरिका ने वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाते हुए तेल टैंकरों की आवाजाही पर सख्ती की है और कुछ कार्गो जब्त भी किए गए हैं। इसके चलते कई शिपिंग कंपनियों ने वेनेजुएला के पानी से अपने जहाज मोड़ लिए हैं। नतीजतन PDVSA के पास कच्चे तेल और ईंधन का स्टॉक बढ़ गया है और निर्यात नवंबर के मुकाबले लगभग आधा रह गया है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
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2021–22 और 2022–23 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत का वेनेजुएला से तेल आयात लगभग खत्म हो गया था।
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लेकिन 2023–24 में भारत का तेल आयात बढ़कर करीब $1 बिलियन पहुंच गया।
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दिसंबर 2023 में भारत कुछ समय के लिए वेनेजुएला का सबसे बड़ा तेल खरीदार भी बना था।
आगे क्या खतरा है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा ओवरसप्लाई वाले बाजार में अमेरिका–वेनेजुएला तनाव का तत्काल असर सीमित रह सकता है। लेकिन अगर:
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संघर्ष लंबा चलता है,
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या अमेरिका प्रतिबंध और सख्त करता है,
तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
भारत पर संभावित असर
अगर वैश्विक कच्चा तेल महंगा होता है तो:
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भारत का तेल आयात बिल बढ़ेगा,
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रुपये पर दबाव पड़ेगा,
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और घरेलू महंगाई (पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट, रोजमर्रा की चीजें) बढ़ सकती है।
फिलहाल स्थिति काबू में है, लेकिन अमेरिका–वेनेजुएला टकराव अगर गहराया तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।