ट्रंप टैरिफ के बीच भारत–ओमान के बीच बड़ा व्यापारिक समझौता, 99% भारतीय निर्यात पर जीरो टैरिफ

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नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर ट्रंप टैरिफ को लेकर व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच भारत ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करते हुए ओमान के साथ एक ऐतिहासिक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता भारत–ओमान संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ता है और व्यापार, निवेश व सेवाओं के क्षेत्र में दोनों देशों के लिए बड़े अवसर खोलने वाला माना जा रहा है।

यह CEPA प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक की मौजूदगी में साइन किया गया। समझौते को औपचारिक रूप भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के वाणिज्य, उद्योग व निवेश प्रोत्साहन मंत्री कैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने दिया। प्रधानमंत्री मोदी इस समय तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में ओमान की राजधानी मस्कट में हैं, जहां उन्होंने दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया।

लगभग 99% भारतीय निर्यात पर शून्य शुल्क

इस समझौते के तहत ओमान ने भारत को अपनी 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस देने पर सहमति जताई है। इसका मतलब यह है कि भारत द्वारा ओमान को किए जाने वाले कुल निर्यात का 99.38 प्रतिशत हिस्सा अब जीरो टैरिफ के दायरे में आ जाएगा। इससे भारतीय उत्पाद ओमान के बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे निर्यातकों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

भारत ने भी दी टैरिफ में रियायत

दूसरी ओर, भारत ने अपनी कुल टैरिफ लाइनों के 77.79 प्रतिशत हिस्से पर ओमान को लिबरलाइज्ड टैरिफ ऑफर किया है। इसमें भारत द्वारा ओमान से किए जाने वाले कुल आयात का 94.81 प्रतिशत शामिल है। इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में तेजी आने की संभावना है।

संवेदनशील उत्पाद समझौते से बाहर

भारत ने अपने घरेलू हितों की रक्षा के लिए कुछ संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है। इनमें कृषि से जुड़े उत्पाद जैसे डेयरी, चाय, कॉफी, रबर और तंबाकू शामिल हैं। इसके अलावा सोना-चांदी के बिस्किट, ज्वेलरी, जूते, खेल का सामान जैसे श्रम-प्रधान उत्पाद और कुछ बेस मेटल्स के स्क्रैप को भी रियायतों से बाहर रखा गया है।

सर्विस सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा

इस CEPA का एक अहम पहलू सर्विस सेक्टर से जुड़ा है। ओमान का ग्लोबल सर्विस इंपोर्ट करीब 12.52 अरब अमेरिकी डॉलर का है, जबकि इसमें भारत की हिस्सेदारी फिलहाल सिर्फ 5.31 प्रतिशत है। यह भारतीय आईटी, प्रोफेशनल सर्विस, हेल्थकेयर, एजुकेशन और कंसल्टेंसी जैसे क्षेत्रों के लिए बड़ा अनटैप्ड पोटेंशियल दर्शाता है। समझौते में वर्कर्स की मोबिलिटी से जुड़ी रियायतें भी शामिल हैं, जिससे भारतीय प्रोफेशनल्स को ओमान में काम करने के और अवसर मिल सकते हैं।

रणनीतिक और आर्थिक महत्व

यह समझौता यूके के साथ हुए एफटीए के बाद पिछले छह महीनों में भारत का दूसरा बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है। वहीं, ओमान के लिए यह 2006 के बाद किसी भी देश के साथ पहला द्विपक्षीय व्यापार समझौता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह CEPA भारत को खाड़ी क्षेत्र में एक मजबूत आर्थिक भागीदार के रूप में स्थापित करेगा और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा।

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