जंतर-मंतर पर नए श्रम कानूनों के खिलाफ बड़ा विरोध अभियान
नोएडा–ग्रेटर नोएडा–गाजियाबाद में शुरू हुआ विरोध अभियान
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) ने नए श्रम कानूनों के विरोध में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में व्यापक अभियान शुरू किया। मजदूरों ने विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में इकठ्ठा होकर इन कानूनों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई।
अनमोल इंडस्ट्री में गेट मीटिंग, मजदूरों ने जताया गुस्सा
नोएडा की अनमोल इंडस्ट्री, उद्योग विहार में सीटू जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार राघव के नेतृत्व में मजदूरों ने गेट पर प्रदर्शन किया।
मुकेश कुमार ने आरोप लगाया कि—
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सरकार ने उद्योगपतियों के दबाव में मजदूर-विरोधी लेबर कोड लागू किए
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नए नियम मजदूरों के हितों को कमजोर करते हैं
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इसके विरोध में बुधवार को जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन का आह्वान किया गया है
उन्होंने मजदूरों से प्रदर्शन में अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की।
पुराने 29 कानून खत्म, 4 नई श्रम संहिताएं लागू—सीटू का आरोप
नोएडा में आयोजित एक बैठक में सीटू जिला सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को खत्म कर 4 नए लेबर कोड लागू किए हैं।
शर्मा के अनुसार, ये नए कानून मजदूरों के हित में नहीं हैं, बल्कि—
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उद्योगपतियों के फायदे के लिए बनाए गए हैं
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मजदूरों का कार्य समय 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया गया
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स्थाई नौकरी की व्यवस्था लगभग खत्म कर दी गई
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यूनियन और हड़ताल के अधिकार पर गंभीर सीमाएं लगा दी गईं
नौकरी से निकालना हुआ आसान, सुरक्षा घटी—मजदूरों में रोष
सीटू नेताओं ने बताया कि लेबर कोड के लागू होने के बाद—
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मालिकों के लिए मजदूरों को नौकरी से निकालना आसान हो गया
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ले–ऑफ या छंटनी में अब पहले जैसी सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं
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अस्थायीकरण बढ़ेगा और पेंशन जैसे लाभ कम होंगे
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युवाओं के स्थाई रोजगार की उम्मीद और कमजोर पड़ेगी
देशभर के 10 मजदूर संगठन भी विरोध में
देश के 10 बड़े मजदूर संगठनों ने भी इन लेबर कोड्स का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि—
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सरकार ने बिना चर्चा, एकतरफा तरीके से ये कानून लागू किए
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मजदूरों से जुड़े महत्वपूर्ण अधिकार कमजोर हो गए हैं
“एकजुट होकर संघर्ष जरूरी”—सीटू नेताओं की अपील
नेताओं ने अंत में कहा कि—
“मजदूरों, किसानों, नौजवानों और आम जनता को मिलकर इन मजदूर-विरोधी कानूनों के खिलाफ संघर्ष करना होगा, तभी इन्हें वापस कराया जा सकता है।”