बेरोजगारों से नौकरी के बहाने 50 हजार तक ठगने वाला कॉल सेंटर का पर्दाफास
– हैदराबाद पुलिस ने आरोपियों पर की कार्रवाई तो नोएडा में खोला फर्जी कॉल सेंटर
बेरोजागरों को नौकरी दिलाने के बहाने ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश करते हुए फेज वन थाने की पुलिस ने दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है। सेक्टर 4 में पिछले पांच महीने से कॉल सेंटर संचालित हो रहा था। आरोपी पहले हैदराबाद में इसी तरह फर्जी कॉल सेंटर खोल लोगों के साथ नौकरी दिलाने के बहाने ठगी करते थे। वहां की पुलिस ने उन पर कार्रवाई की और कॉल सेंटर सीज कर दिया। इसके बाद जालसाज नोएडा में आए और एक बिल्डिंग में ऑफिस खोलकर ठगी का खेल शुरू कर दिया। ये दोनों एक वेबसाइट से बेरोजगार युवाओं का डाटा 30 हजार रुपये में खरीदते थे। खुद को नौकरी डॉटकॉम कर्मचारी बताकर युवाओं को झांसे में लेकर ठगी करते थे। झांसे में लेने के बाद पीड़ितों से 950 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस और दस्तावेज वेरिफिकेशन, एम्पलाअमेंट वेरीफिकेशन, एनओसी चार्ज के बहाने 50 हजार रुपये तक जमा करा लेते थे। इसके बाद पीड़ित का मोबाइल नंबर ब्लाक कर देते थे। अब तक दोनों ने मिलकर 300 से अधिक लोगों के साथ ठगी कर चुके हैं। पुलिस ने दोनों को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
एडीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि नोएडा के साथ दूसरे राज्यों से नौकरी के बहाने ठगी करने शिकायती मिली थी। जांच के लिए फेज वन थाने में एक टीम बनाई गई। शुक्रवार को इंटेलिजेंस और सर्विलांस टीम की मदद से थाने की टीम सेक्टर 4 के एक बिल्डिंग में पहुंची। सेकंड फ्लोर पर कॉल सेंटर का ऑफिस मिला। जिसमें कुछ लोग मिले। पुलिस टीम जांच के बाद कॉल सेंटर दो मालिकों को अरेस्ट कर लिया। जिनकी पहचान अनुज कुमार निवासी मेरठ और रोमेश मलिक जिला शामिल के रूप में हुई है। दोनों दिल्ली के अशोकनगर में किराए का कमरा लेकर रहते हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि ये लोग फॉउंडीत डॉटकॉम से 30 हजार रुपये में नौकरी तलाश रहे युवाओं का डेटा लेते थे। इसके बाद ये लोग कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियों को सौंप देते थे। जिनका काम बेरोजगारों को कॉल कर नौकरी की स्कीम के बारे में जानकारी देनी होती थी। बदले में उन्हें सैलरी के साथ कमीशन दिया जाता था। आरोपी पिछले 10 साल से इस तरह का काम कर रहे थे। पीड़ित को 25 से 35 महीने की नौकरी का झांसा देकर उनसे एक ऑनलाइन फॉर्म भरवाया जाता था। जिसकी फीस 950 रुपये तय थी। उसे भरने के बाद पीड़ितों से 50 हजार रुपये अलग-अलग बहाने से ट्रांसफर करा लिए जाते थे। पुलिस इन लोगों के पास से 11 कीपैड मोबाइल फोन1 स्मार्ट फोन वीवो, 7 स्टांप मोहर ,4 फर्जी जॉयनिग लेटर, 4 कम्प्यूटर मानिटर, 4 सीपीयू , 4 कीबोर्ड, 4 माउस और 34 ऑफिस फोन से प्राप्त सेक्रिनशॉट मिले हैं।
सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर भी लेते थे झांसे मेंपूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वो सोशल मीडिया पर अच्छी कंपनी में नौकरी पाने का विज्ञापन देकर युवाओं को झांसे में लेते थे। बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश के बेरोजगारों को टारगेट कर उनके साथ ठगी कर रहे थे। ताकी पीड़ित उनके ऑफिस तक न पहुंच पाए। उनके जाल में फंसने के बाद कोई कॉल करता था, इसके बाद ठगी का खेल शुरू होता था। रुपये ठगने के बाद आरोपी पीड़िता का मोबाइल नंबर ब्लाक कर देते हैं।
फर्जी जॉइनिंग ऑफर लेटर भी देते थे
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ऑनलाइन ही पीड़ितो के मोबाइल पर फर्जी जॉइनिंग लेटर भी भेजते थे। पुलिस ने उनके पास से 34 जॉइनिंग लेटर भी बरामद किया है। पूछताछ में जालसाजों ने पीड़ितों को अच्छी कंपनी में नौकरी की बात करते हैं। विश्वास में लेने के लिए उन्हें फर्जी जॉइनिंग लेटर भी मोबाइल पर भेज देते हैं। इसके बाद उनसे फीस और अन्य चार्ज वसूल लिए जाते हैं। आरोपी 25 हजार रुपये लेकर 70 हजार रुपये तक ठगी करते हैं।
महिला कर्मी को सिर्फ 1 महीने के लिए करते हायर
आरोपी पूछताछ में बताए कि वो लोग कॉल सेंटर में कॉल करने के लिए सिर्फ महिला कर्मचारी 1 माह के लिए हायर करते थे। उन्हें ट्रेनिंग देने के बाद आरोपी कॉल लगाने और युवाओं को झांसे में लेने की जिम्मेदारी सौंप देते थे। वहीं अगर किसी को उनके काम के बारे में जानकारी हो हाती थी तो उन्हें नौकरी से किसी बहाने निकाल देते थे। साथ कई लोगों को यह बोलकर नौकरी पर रखते थे, उन्हें एक महीने के लिए ही कर्मचारी की जरूरत है। इसके बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा। कई लोग जालसाजों के लिए पार्ट टाइम भी काम करते थे। दोनों हैदराबाद में 2017 में इसी तरह का फर्जीवाड़ा कर रहे थे।