8 दिन ‘डिजिटल अरेस्ट’ में फंसा रिटायर्ड अधिकारी, साइबर ठगों ने उड़ाए 31 लाख रुपये
ट्राई अधिकारी, दिल्ली पुलिस और ईडी अफसर बनकर बुजुर्ग को बनाया निशाना — वीडियो कॉल पर की फर्जी जांच
नोएडा के सेक्टर-100 में रहने वाले 83 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षा विभाग अधिकारी के साथ साइबर ठगों ने आठ दिन तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर 31 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI), दिल्ली पुलिस और बाद में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को झांसे में लिया। वीडियो कॉल पर फर्जी जांच का नाटक कर आरोप लगाया कि उनके नाम से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है। डर और दबाव में आकर पीड़ित ने अपनी सारी एफडी तोड़कर ठगों के बताए खातों में रकम ट्रांसफर कर दी।
कैसे शुरू हुआ ठगी का सिलसिला
यह पूरा मामला 24 अक्टूबर की सुबह शुरू हुआ, जब पीड़ित कुमुद बहादुर, जो सेक्टर-100 की एक सोसायटी में परिवार संग रहते हैं, को एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाला व्यक्ति खुद को TRAI का कर्मचारी बता रहा था। उसने कहा कि उनके मोबाइल नंबर से कुछ संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं और अगर जांच में सहयोग नहीं किया तो दो घंटे में सिम बंद कर दी जाएगी।
पीड़ित के पूछने पर ठग ने कहा कि उनके आधार कार्ड से केनरा बैंक में एक फर्जी खाता खोला गया है, जिसमें 80 लाख रुपये के अवैध लेनदेन हुए हैं। कुछ ही मिनटों बाद उन्हें दिल्ली दरियागंज थाने से बताकर एक वीडियो कॉल आई। कॉल पर ठगों ने पुलिसकर्मी की वर्दी पहन रखी थी और उन्होंने बताया कि पीड़ित के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है।
ऑनलाइन सुनवाई और संपत्ति की जानकारी जुटाई
ठगों ने व्हाट्सएप पर गिरफ्तारी वारंट भेजकर पीड़ित को डराया और कहा कि उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। जब कुमुद बहादुर ने अपनी उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति बताई, तो ठगों ने “ऑनलाइन सुनवाई” का नाटक किया।
उन्होंने हर दिन दो बार वीडियो कॉल पर बयान दर्ज करने के नाम पर पूछताछ की और इसी दौरान पीड़ित की संपत्ति, बैंक खाते और एफडी की पूरी जानकारी हासिल कर ली।
इसके बाद ठगों ने कहा कि जांच पूरी करने के लिए रकम “वेरिफाई” करानी होगी। इस बहाने उन्होंने पीड़ित से एफडी तोड़कर रकम एक खाते में इकट्ठा करने को कहा और फिर 28 अक्टूबर को 23 लाख रुपये तथा 29 अक्टूबर को 8 लाख रुपये दिल्ली के द्वारका स्थित इंडसइंड बैंक शाखा के खाते में ट्रांसफर करा लिए।
ईडी अधिकारी बनकर डाला दबाव
पैसे लेने के बाद भी ठगों ने पीड़ित को नहीं छोड़ा। उन्होंने अगले दिन ईडी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल की और कहा कि अब मामला ईडी को ट्रांसफर किया गया है। कॉल पर उन्हें धमकाया गया, जिससे पीड़ित को शक हुआ। जब ठगों ने लगातार डराना शुरू किया, तो उन्होंने हिम्मत जुटाकर 1930 नंबर पर कॉल की और एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस जांच में जुटी
पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाने की पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस खाते में रकम ट्रांसफर की गई, वह ‘जिमप्लेट एंटरप्राइजेज’ के नाम से चल रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ठगों की पहचान के लिए खातों और डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस ने कहा कि “टीमें सक्रिय हैं और जल्द ही ठगों का पर्दाफाश किया जाएगा।”