डायबिटीज के मरीजों के लिए आयुर्वेद बना नई उम्मीद: जब अंग्रेजी दवाएं न दे पाईं राहत, तो देशी इलाज ने दिखाया असर
नोएडा के सेक्टर-39 स्थित आयुर्वेदिक औषधि विभाग बना भरोसेमंद केंद्र, प्राकृतिक उपचार से मिल रही अंदरूनी मजबूती
तेजी से बदलती जीवनशैली और जंक फूड के बढ़ते चलन ने डायबिटीज जैसी बीमारियों को आम बना दिया है। वर्षों से लोग इस बीमारी से राहत पाने के लिए अंग्रेजी दवाओं पर निर्भर रहे हैं, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। नोएडा के सेक्टर-39 स्थित आयुर्वेदिक औषधि विभाग में रोजाना 6 से 7 नए डायबिटीज मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। हर महीने यहां करीब 160 से 180 मरीज आयुर्वेदिक उपचार ले रहे हैं — जिनमें से लगभग 90 प्रतिशत पहले एलोपैथिक दवाओं पर थे।
डॉक्टरों के अनुसार, एलोपैथिक दवाओं से ब्लड शुगर नियंत्रित तो रहता है, लेकिन लंबे समय तक सेवन से शरीर में कमजोरी, गैस, नींद की समस्या और लिवर संबंधी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। वहीं, आयुर्वेदिक उपचार शरीर के संपूर्ण संतुलन पर काम करता है। जो मरीज नियमित रूप से आयुर्वेदिक औषधियां, योग और संतुलित आहार अपना रहे हैं, उनमें शुगर लेवल सामान्य होने के साथ दवाओं की मात्रा भी घटाई जा रही है।
आयुर्वेदिक उपचार: प्राकृतिक, सुरक्षित और संतुलित तरीका
सेक्टर-39 स्थित विभाग में मरीजों का उपचार पारंपरिक तरीकों से किया जाता है। यहां नाड़ी परीक्षण द्वारा व्यक्ति की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) जानकर औषधि दी जाती है। प्रमुख दवाओं में गुड़मार, मेथी, जामुन बीज, नीम, करेला रस, त्रिफला और शिलाजीत शामिल हैं। इनसे शरीर का मेटाबॉलिज्म नियंत्रित होता है और ब्लड शुगर स्तर संतुलित रहता है।
मरीजों को योग और प्राणायाम — जैसे कपालभाति, अनुलोम-विलोम और मंडूकासन — करने की सलाह दी जाती है, जो अग्नाशय को सक्रिय कर इंसुलिन नियंत्रण में मदद करते हैं।
55 वर्षीय राधेश्याम शर्मा (परिवर्तित नाम), जो 10 वर्षों से डायबिटीज से जूझ रहे थे, ने जब आयुर्वेदिक इलाज अपनाया तो कुछ ही महीनों में उनका शुगर लेवल सामान्य हो गया। उन्होंने कहा, “अब मैं न केवल स्वस्थ महसूस करता हूं, बल्कि खानपान और दिनचर्या में भी सकारात्मक बदलाव आया है।”
आयुर्वेद सिर्फ दवा नहीं, बल्कि जीवनशैली सुधार का माध्यम है
डॉ. दीपिका त्यागी (आयुर्वेदिक विभाग, सेक्टर-39) के अनुसार, “हम मरीजों को सादा, सात्विक भोजन अपनाने की सलाह देते हैं — जिसमें जौ, मूंग, करेले की सब्जी, नीम पत्ते और कच्ची सब्जियां शामिल हों। चीनी, तले और पैक्ड फूड से पूरी तरह परहेज़ जरूरी है।”