Noida farjee NOC: फ्लैट बेचने का आरोप, बिल्डर और फाइनेंस कंपनी पर धोखाधड़ी का केस दर्ज
Noida farjee NOC: सेक्टर-70 निवासी खरीदार का दावा- विवादित जमीन पर बना था टावर, आरटीआई में खुली पोल; कोर्ट के आदेश पर फेस-3 थाने में एफआईआर
Mediawali news, Noida
Noida farjee NOC में एक बार फिर फ्लैट खरीददारों से कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। Sector 70 निवासी एक व्यक्ति ने बिल्डर और हाउसिंग फाइनेंस कंपनी पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फ्लैट बेचने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि फ्लैट खरीदते समय उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि जमीन और बिल्डिंग से जुड़े सभी दस्तावेज वैध हैं और Noida Authority से आवश्यक एनओसी प्राप्त की जा चुकी है। हालांकि बाद में आरटीआई से मिली जानकारी में पूरा मामला संदिग्ध निकला। कोर्ट के आदेश पर Phase-3 Police Station पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित दीपक कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने वर्ष 2017 में “हरित टावर” नामक मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में तीसरी मंजिल पर स्थित एक फ्लैट खरीदा था। यह फ्लैट बिल्डर सौरव राणा ने करीब 23.50 लाख रुपये में बेचा था। दीपक कुमार के अनुसार, उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी से लगभग 5.10 लाख रुपये दिए थे, जबकि बाकी 18.40 लाख रुपये का भुगतान GIC Housing Finance से होम लोन लेकर किया गया।
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Noida प्राधिकरण से सभी जरूरी मंजूरियां एवं एनओसी प्राप्त
पीड़ित का आरोप है कि फ्लैट खरीदने से पहले बिल्डर ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि परियोजना पूरी तरह वैध है और र Noida Authority से सभी जरूरी मंजूरियां एवं एनओसी प्राप्त हैं। इसी आधार पर हाउसिंग फाइनेंस कंपनी ने भी कानूनी जांच का हवाला देते हुए लोन मंजूर कर दिया। दीपक कुमार का कहना है कि उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि संपत्ति पूरी तरह सुरक्षित और कानूनी रूप से वैध है, इसलिए उन्होंने बिना किसी आशंका के निवेश कर दिया। मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब पीड़ित ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत संबंधित जमीन और प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी मांगी। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों में कथित रूप से खुलासा हुआ कि जिस जमीन पर हरित टावर बनाया गया, वह विवादित थी। साथ ही संबंधित खसरों पर र Noida Authority की वैध एनओसी भी उपलब्ध नहीं थी। पीड़ित का आरोप है कि बिल्डर ने फर्जी एनओसी और गलत दस्तावेज दिखाकर फ्लैट की बिक्री की। दीपक कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में फाइनेंस कंपनी की भूमिका भी संदिग्ध रही। उनका कहना है कि यदि जमीन और दस्तावेजों की सही तरीके से जांच की जाती, तो लोन कभी स्वीकृत नहीं होता। पीड़ित के मुताबिक, बिना पर्याप्त सत्यापन के बैंक अधिकारियों ने करोड़ों रुपये की परियोजना में लोन जारी कर दिया और पूरी लोन राशि सीधे बिल्डर के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। पीड़ित ने शिकायत में यह भी कहा है कि विवाद सामने आने के बाद उन्होंने होम लोन की किस्तें जमा करना बंद कर दिया। उनका कहना है कि उन्हें डर है कि भविष्य में यदि जमीन या भवन को लेकर कोई कानूनी कार्रवाई होती है, तो उनका फ्लैट उनसे छीना जा सकता है। ऐसे में वह आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से परेशान हैं। दीपक कुमार का दावा है कि इस तरह केवल उनके साथ ही नहीं, बल्कि कई अन्य फ्लैट खरीदारों के साथ भी धोखाधड़ी हुई है। उनका आरोप है कि बिल्डर और फाइनेंस कंपनी की मिलीभगत से लोगों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए फ्लैट बेचे गए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि एनओसी वास्तव में फर्जी थी या नहीं, और यदि दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बिल्डरों और रियल एस्टेट परियोजनाओं से जुड़े कई विवाद सामने आ चुके हैं। कई मामलों में फ्लैट खरीदारों ने बिल्डरों पर फर्जी वादे करने, समय पर कब्जा न देने और अधूरी कानूनी प्रक्रिया के बावजूद फ्लैट बेचने के आरोप लगाए हैं। ऐसे मामलों ने रियल एस्टेट सेक्टर में खरीदारों के भरोसे को भी प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले खरीदारों को जमीन के दस्तावेज, प्राधिकरण की मंजूरी, एनओसी और रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड की स्वतंत्र रूप से जांच जरूर करनी चाहिए। साथ ही केवल बिल्डर या फाइनेंस कंपनी के दावों पर भरोसा करने के बजाय कानूनी सलाह लेना भी जरूरी है। फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच जारी है और आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।