सांसद-विधायक के आने पर अब IAS-IPS अफसर खड़े होकर करेंगे स्वागत
अब नेताओं को सरकारी प्रोटोकॉल वाली फुल इज्जत
सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज है।
कुछ लोग इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं।
जबकि कुछ इसे अफसरशाही पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने वाला फैसला मान रहे हैं।
Mediawali news, Noida
यूपी में अब अफसरों और जनप्रतिनिधियों के रिश्तों को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। योगी सरकार ने साफ कर दिया है कि सांसदों और विधायकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना अब सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि सरकारी प्रोटोकॉल का हिस्सा होगा। मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जब कोई सांसद या विधायक सरकारी दफ्तर पहुंचे तो अधिकारी अपनी सीट से खड़े होकर उनका स्वागत करें, उन्हें बैठाएं पानी ऑफर करें और उनकी बात गंभीरता से सुनें।
आईएएस-आईपीएस के साथ सभी अफसर करेंगे स्वागत
नए निर्देश सिर्फ आईएएस-आईपीएस अधिकारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू होंगे। आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर किसी सांसद या विधायक का फोन आए तो उसे प्राथमिकता से उठाया जाए। अगर अधिकारी किसी मीटिंग या व्यस्तता की वजह से कॉल रिसीव नहीं कर पाते हैं तो बाद में खुद कॉल बैक करना अनिवार्य होगा।
दरअसल, पिछले कुछ महीनों से यूपी विधानसभा में लगातार यह मुद्दा उठ रहा था कि कई अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाते और उन्हें उचित सम्मान नहीं देते। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने विधानसभा में अफसरों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई थी। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी सरकार से कहा था कि जनप्रतिनिधियों की अनदेखी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।
इसी के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए नया प्रोटोकॉल जारी किया। शासन का मानना है कि सांसद और विधायक जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि होते हैं और वे जनता की समस्याएं लेकर अधिकारियों के पास पहुंचते हैं। इसलिए उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार जरूरी है।