विधानसभा सुरक्षा में सेंध: आरोपी के खुलासों से बढ़ी चिंता
Mediawali news
Delhi Legislative Assembly की सुरक्षा में बड़ी चूक सामने आई, जब सरबजीत सिंह (37) कार लेकर वीवीआईपी गेट तोड़ते हुए परिसर में घुस गया। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
संसद में घुसने की भी थी योजना
आरोपी ने दावा किया कि वह Parliament House में भी इसी तरह कार लेकर घुसना चाहता था। उसका मकसद किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सरकार और बड़े नेताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना था। वह प्रधानमंत्री Narendra Modi से मिलकर अपनी शिकायत रखना चाहता था।
बरेली से दिल्ली तक का सफर
जांच में सामने आया कि आरोपी 3 अप्रैल को Bareilly से Punjab गया और फिर दिल्ली पहुंचा। रास्ते में Panipat से उसने गुलदस्ता और मालाएं खरीदीं। उसका इरादा किसी बड़े अधिकारी या नेता से मिलकर अपनी बात रखने का था। लेकिन विधानसभा का गेट बंद मिलने पर उसने गाड़ी से गेट तोड़कर अंदर प्रवेश किया, गुलदस्ता रखा और फरार हो गया।
सुरक्षा में चूक, जांच तेज
घटना के समय परिसर में करीब 44 पुलिस और अर्द्धसैनिक बल के जवान तैनात थे। बावजूद इसके आरोपी का अंदर घुसना सुरक्षा में बड़ी चूक माना जा रहा है। Delhi Police ने इस मामले की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी है और संबंधित कर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
खालिस्तानी एंगल की भी जांच
हालांकि आरोपी ने किसी साजिश से इनकार किया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हर पहलू से जांच कर रही हैं। उसके मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच की जा रही है। एजेंसियां खालिस्तानी एंगल को भी ध्यान में रखते हुए जांच कर रही हैं।
मानसिक स्वास्थ्य का पहलू
परिजनों के अनुसार सरबजीत पिछले करीब 9 साल से डिप्रेशन का मरीज है और Shahjahanpur के सरकारी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। बताया गया कि वह पिछले एक हफ्ते से दवा नहीं ले रहा था, जिससे उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी।
भांजे की गुमशुदगी से बढ़ा तनाव
आरोपी के 20 वर्षीय भांजे हरमनदीप सिंह के लापता होने ने उसे और तनाव में डाल दिया। हरमनदीप Hari Nagar में रहकर बीटेक की पढ़ाई कर रहा था और 1 अप्रैल से गायब है। आखिरी लोकेशन Anandpur Sahib में मिली थी। इस घटना के बाद सरबजीत मानसिक रूप से और अस्थिर हो गया। यह मामला सिर्फ सुरक्षा चूक का नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, व्यक्तिगत तनाव और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से जुड़ा एक जटिल मुद्दा बन गया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी के दावों में कितनी सच्चाई है और क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं छिपी है।