हाईराइज सोसायटी ने ली मासूम की जान: लापरवाही और असुरक्षा बन रही बच्चों के लिए मौत का कारण
Mediawali news
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ऊंची-ऊंची इमारतें जहां एक तरफ आधुनिक जीवनशैली का प्रतीक मानी जाती हैं, वहीं दूसरी तरफ ये अब छोटे बच्चों के लिए खतरनाक साबित होती जा रही हैं। शुक्रवार को गौड़ सिटी-1 की 7वें एवेन्यू सोसायटी में हुई दर्दनाक घटना ने इस सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया, जब 12वीं मंजिल से गिरकर 3 साल के मासूम सागनिक की मौत हो गई।
यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि हाईराइज सोसायटियों की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। बताया जा रहा है कि बच्चा घर में अकेला था और खेलते-खेलते बालकनी तक पहुंच गया। वहां रखी कुर्सी पर चढ़कर नीचे झांकने के दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नीचे जा गिरा। सवाल यह है कि आखिर इतनी ऊंची इमारतों में बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं हैं?
आजकल अधिकतर हाईराइज सोसायटियों में बालकनियों की रेलिंग या तो कम ऊंची होती है या उनके बीच इतना गैप होता है कि छोटे बच्चे आसानी से जोखिम में आ सकते हैं। कई जगहों पर सेफ्टी ग्रिल या जाली तक नहीं लगाई जाती, जिससे हादसों की आशंका और बढ़ जाती है। इसके अलावा, घरों की डिजाइन भी ऐसी होती है जहां बालकनी तक पहुंचना बच्चों के लिए बेहद आसान होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम की कमी है। बिल्डर्स और सोसायटी प्रबंधन अक्सर सौंदर्य और डिजाइन पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जबकि सुरक्षा को नजरअंदाज कर दिया जाता है। नतीजा यह होता है कि मासूम बच्चे इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाते हैं।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि माता-पिता की थोड़ी सी मजबूरी या लापरवाही भी कितनी भारी पड़ सकती है। लेकिन असली जिम्मेदारी उन व्यवस्थाओं की है जो ऐसी घटनाओं को रोक सकती थीं—जैसे ऊंची और सुरक्षित रेलिंग, मजबूत जाली, और बालकनी के पास खतरनाक वस्तुओं को हटाना।
हर साल इस तरह के हादसे सामने आते हैं, लेकिन फिर भी ठोस कदम नहीं उठाए जाते। अब समय आ गया है कि हाईराइज सोसायटियों में बच्चों की सुरक्षा को अनिवार्य बनाया जाए। बिल्डर्स के लिए सख्त नियम हों, और हर फ्लैट में बालकनी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। अगर अब भी हम नहीं चेते, तो ये ऊंची इमारतें सपनों का घर नहीं, बल्कि मासूमों के लिए खतरे का घर बनती रहेंगी।